Feed on
Posts
Comments

Archive for the ‘judiciary’ Category

    शिक्षा की अपनी एक दुनिया है । वहीं शिक्षा-जगत व्यापक विश्व का एक हिस्सा भी है - एक उप व्यवस्था । उप व्यवस्था होने के कारण व्यापक विश्व के- मूल्य , विषमतायें , सत्ता सन्तुलन आदि के प्रतिबिम्ब आप यहाँ भी देख सकते/सकती हैं । हर जमाने की शिक्षा व्यवस्था उस जमाने के मूल्य [...]

Read Full Post »

Technorati tags: blogs, ban, aggregator, double jeopardy
चिट्ठकार राहुल जन्मना भारतीय है । उस पर भारत का संविधान लागू होता है । भारत के किस्से , कहानियाँ और कहावतें भी । एक किस्सा चर्चित है जिसमें असामी से सजा देने वाले पूछते हैं , ‘ पाँच किलो प्याज खाओगे या पचास चप्पल ? ‘ इसमें असामी [...]

Read Full Post »

 
योगेन्द्र यादव
समाजशास्त्री

जो लोग आरक्षण को ख़ारिज करते हैं, वो तो हमेशा से सामाजिक न्याय के सवाल को भी ख़ारिज करते रहे हैं. ये वो लोग हैं जो कि हिंदुस्तान के मध्यम वर्ग को अन्य वर्गों के लिए कुछ भी छोड़ना पड़े, इस स्थिति के लिए तैयार नहीं हैं.
ये वे लोग हैं जिन्होंने न तो [...]

Read Full Post »

Older Posts »