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Archive for the ‘online journalism’ Category

Technorati tags: परिवर्तन, नारी सहभाग, चिट्ठेकारी
    बोध गया के महन्तों की सैंकड़ों एकड़ खेती की जमीन पर ‘जो जमीन को जोते बोए, वो जमीन का मालिक होवे’ के पुराने नारे के अनुरूप भूमिहीनों के हक की लड़ाई छात्र युवा संघर्ष वाहिनी ने लड़ी और जीती थी । इस आन्दोलन के दरमियान एक अन्य सूत्र भी [...]

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Technorati tags: posts index, samajwadi janaparishad, प्रविष्टी सूची, समाजवादी जनपरिषद

    यह चिट्ठा १५ अगस्त  २००६ को शुरु किया था । दिसम्बर २००६ तक ‘नारद’ पर नहीं लिया गया था इसलिए तब सर्च इंजन अथवा अन्य चिट्ठों पर की गयी मेरी टिप्पणियों अथवा ईमेल से मेरे द्वारा भेजी गयी कड़ियों से ही पाठक पहुँचते थे । दिसम्बर [...]

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Technorati tags: bloggers’ meet, delhi
    चिट्ठाकारी से जुड़े पत्रकार , छात्र , गृहणियाँ ,व्यवसायी ,अध्यापक और गीक १४ जुलाई ,’०७ को दिल्ली में मिले । इस माध्यम से जुड़े इन विविध पृष्टभूमि के लोगों की बातचीत में भी विविधता थी लेकिन एक अन्तर्धारा सभी को जोड़ रही थी । रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्राप्त [...]

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Technorati tags: chitthajagat, disclaimer
‘चिट्ठाजगत’ का प्रतिदावा यहाँ प्रसार के लिए दिया जा रहा है । प्रतिदावों की तुलना करने पर नीतियों में अन्तर स्पष्ट हो जाता है ।

प्रतिदावा
चिट्ठाजगत एक स्वचालित सङकलक (एग्रीगेटर) है जो कि सार्वजनिक xml बौछारों (फ़ीड) से प्रविष्टियों को संग्रहित कर प्रस्तुत करता है।
चिट्ठाजगत का उद्देश्य है मुक्त रूप से निज अभिव्यक्ति [...]

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ब्लागवाणी देशज भाषाओं के ब्लाग्स का भारतीय एग्रीगेटर है.
ब्लागवाणी पूरक है, सहायक है, किसी भी एग्रीगेटर का विकल्प नहीं है.
जितने भी अधिक ब्लाग्स एग्रीगेटर या देशी भाषाओं की वेबसाईटें होंगीं, उतना ही देशी भाषाओं का प्रसार और प्रचार होगा, उतने ही अधिक पाठक आयेंगे.  ब्लागवाणी भी अपने साथ पाठक समूह को समेटेगा और देशी भाषाओं [...]

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Technorati tags: blogs, geeks, goongi kabaddi
‘ धुरविरोधी ‘ के चिट्ठे पर जीतू ने कहा था , 
ये सच है कि पहले भी इस तरह की भाषा का प्रयोग होता रहा है, लेकिन हमेशा हम चुप नही रह सकते। कभी ना कभी तो निर्णय लिया ही जाना था।
ये मेरा आखिरी स्पष्टीकरण है, इसके बाद नारद की तरफ़ [...]

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Technorati tags: blogs, ban, aggregator, double jeopardy
चिट्ठकार राहुल जन्मना भारतीय है । उस पर भारत का संविधान लागू होता है । भारत के किस्से , कहानियाँ और कहावतें भी । एक किस्सा चर्चित है जिसमें असामी से सजा देने वाले पूछते हैं , ‘ पाँच किलो प्याज खाओगे या पचास चप्पल ? ‘ इसमें असामी [...]

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हत्यारों के गिरोह का
एक सदस्य हत्या करता है
दूसरा उसे दुर्भाग्यपूर्ण बताता है
तीसरा मारे गए आदमी के दोष गिनाता है
चौथा हत्या का औचित्य ठहराता है
पाँचवाँ समर्थन में सिर हिलाता है
 
और अन्त में सब मिलकर
बैठक करते हैं
अगली हत्या की योजना के सम्बन्ध में ।
                                     -  राजेन्द्र राजन .

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Technorati tags: blogs, ban, aggregator
डेरा  सच्चा सौदा की माफ़ी अकाल-तख्त ने नामंजूर की । गुरु गोविन्दसिंह से क्यों माँगी माफी ? हमसे क्यों नहीं माँगी ? लगता है ‘नारद पर प्रतिबन्धित चिट्ठे’ के लेखक द्वारा सभी आहत चिट्ठेकारों से खेद प्रकट करने और नारद के फैसले से विरोध जारी रखने में ऐसी ही कोई जिच फँस गयी [...]

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Technorati tags: blogs, online journalism
,
[ चिट्ठाकारी पर पिछली पोस्ट से कुछ अनुदित सामग्री सम्पादित कर प्रस्तुत की जा रही है। हिन्दी चिट्ठेकारों ने विषय में रस लिया और बहस भी चलायी । आज निकोलस कार्र के चिट्ठे से यह बहुचर्चित वक्तव्य यहाँ दिया जा रहा है । ]
मंगलाचरण
    किसी जमाने की बात है चिट्ठालोक नामक एक टापू था [...]

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