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Archive for the ‘poem’ Category

वे हर वक्त पिले रहते हैं
इतिहास में अपनी जगह बनाने में
 
सिर्फ उन्हें मालूम है
कितनी जगह है इतिहास में
शायद इसीलिए वे एक दूसरे को
धकियाते रहते हैं हर वक्त
 
उनकी धक्कामुक्की
मुक्कामुक्की से बनता है
उनका इतिहास
 
इस तरह
इतिहास में अपनी जगह बना
लेने के बाद
वे तय करते हैं
इतिहास में दूसरों की जगह
 
जो इतिहास में उनकी बतायी
हुई जगह पर
रहने को राजी नहीं [...]

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दौलत की तलबगार है अखबार नवीसी |
इस दौर मेँ व्यापार है अखबार नवीसी ||
कल तक तो बात और थी लेकिन ए दोस्त आज
सत्ता की चाटुकार है अखबार नवीसी ||
फैशन ,फसाद,फिलम ,फूश और फजूलियात
इन सबकी तरफदार है अखबार नवीसी | |
मिल जायेगी दुनिया की हर एक चीज इसी मेँ |
यारोँ खुला बाजार है अखबार नवीसी ||

 
रुतबा [...]

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Technorati tags: raghuveer sahai, poems
बड़ा अफ़सर
इस विषय पर विचार का कोई प्रश्न नहीं
निर्णय का प्रश्न नहीं
फिर से समीक्षा का प्रश्न नहीं
प्रश्न से भागता गया
उत्तर देते हुए इस तरह बड़ा अफ़सर ।
प्रश्न
आमने सामने बैठे थे
रामदास मनुष्य और मानवेन्द्र मंत्री
रामदास बोले आप लोगों को मार क्यों रहे हैं ?
मानवेन्द्र भौंचक सुनते रहे
थोड़ी देर बाद रामदास को लगा
कि [...]

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हत्यारों के गिरोह का
एक सदस्य हत्या करता है
दूसरा उसे दुर्भाग्यपूर्ण बताता है
तीसरा मारे गए आदमी के दोष गिनाता है
चौथा हत्या का औचित्य ठहराता है
पाँचवाँ समर्थन में सिर हिलाता है
 
और अन्त में सब मिलकर
बैठक करते हैं
अगली हत्या की योजना के सम्बन्ध में ।
                                     -  राजेन्द्र राजन .

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 युद्ध : एक
हम चाहते हैं कि युद्ध न हों
मगर फौजें रहें
ताकि वे एक दूसरे से ज्यादा बर्बर
और सक्षम होती जायें कहर बरपाने में
 
हम चाहते हैं कि युद्ध न हों
मगर दुनिया हुकूमतों में बँटी रहे
जुटी रहे घृणा को महिमामण्डित करने में
 
हम चाहते हैं कि युद्ध न हों
मगर इस दुनिया को बदलना भी नहीं चाहते
 
हमारे जैसे लोग
भले [...]

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एक भाषा हुआ करती है
जिसमें जितनी बार मैं लिखना चाहता हूँ ‘आँसू’ से मिलता-जुलता कोई शब्द
हर बार बहने लगती है रक्त की धार
 
एक भाषा है जिसे बोलते वैज्ञानिक और समाजविद और तीसरे दर्जे के जोकर
और हमारे समय की सम्मानित वेश्याएँ और क्रांतिकारी सब शर्माते हैं
जिसके व्याकरण और हिज्जों की भयावह भूलें ही
कुलशील , वर्ग और [...]

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मैं जितने लोगों को जानता हूँ
उनमें से बहुत कम लोगों से होती है मिलने की इच्छा
बहुत कम लोगों से होता है बतियाने का मन
बहुत कम लोगों के लिए उठता है आदर-भाव
बहुत कम लोग हैं ऐसे
जिनसे कतरा कर निकल जाने की इच्छा नहीं होती
काम-धन्धे, खाने-पीने, बीवी-बच्चों के सिवा
बाकी चीजों के लिए
बन्द हैं लोगों के दरवाजे
बहुत कम [...]

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