समाजवादी जनपरिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष साथी विष्णुदेव गुप्त द्वारा स्थापित डॉ राममनोहर लोहिया बालिका विद्यालय , मधुबन के प्रांगण में सजप-उ.प्र राज्य समिति की बैठक दिनांक २४ नवम्बर , २०१२ को राज्य उपाध्यक्ष साथी रामछबीला साहनी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।
उपस्थिति – शैलेश कुमार (वि.यु.स.,निमंत्रित),नंदकिशोर विश्वकर्मा (निमंत्रित), सदस्य- लोकनाथ मौर्य,लालबिहारी राजभर,विजयी मौर्य,रामछबीला साहनी,शेषमणि त्रिपाठी,रामलच्छन मौर्य,शिवप्रसाद दुबे,सत्येन्द्र दुबे,रामकेवल चौहान,रामसरीख विश्वकर्मा,विक्रमा मौर्य,जयराम भारती,डॉ. स्वाति, बृजबिहारी मल्ल,चंचल मुखर्जी,सुनील कुमार,अफलातून तथा रामजनम ने भाग लिया ।
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शेषमणि त्रिपाठी (सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी)
- १९९१-’९२ में आर्थिक उदारीकरण की नीतियों को लागू किए जाने के बाद से घपले-घोटाले बढ़ रहे हैं । इन्होंने मार्क्स ,लेनिन व लोहिया को उद्धृत करते हुए भ्रष्टाचार के लिए पूंजीवादी व्यवस्था को जिम्मेदार बताया।
भले ही , १००० पंजीकृत दल हों मगर विचारधारा पर आधारित एक मात्र सजप है । पिछले दो सालों से अन्ना हजारे के नेतृत्व में जो आन्दोलन चल रहा है उसका नाम अंग्रेजी में क्यों है ? इसके कार्यक्रमों में जो मजमा जुटता है वह शहरी मध्य वर्ग का होता है । अन्ना की ईमानदारी पर शक नहीं लेकिन आन्दोलन के कार्यकर्ताओं किसानों – मजलूमों से कोई मतलब नहीं । इन्हें मीडिया का जो फोकस मिल रहा है उसमें भी पैसे का खेल है । गोरखपुर इकाई ने २७ सितम्बर २०१२ को समान शिक्षा ,सांस्कृतिक क्रांति,अंग्रेजी के वर्चस्व की समाप्ति के मुद्दों से भ्रष्टाचार का संबंध रेखांकित करते हुए धरना दिया था। हमें अपनी भीतरी कमियों को दूर करना होगा,त्याग करना होगा और सक्रियता बढ़ानी होगी ।
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अफलातून (सदस्य , राष्ट्रीय कार्यकारिणी)
शेषमणिजी की बातों से यह स्पष्ट हो गया कि इस दल का हर सदस्य मजबूत धरातल पर खड़ा है और उसके भ्रमित होने का सवाल नहीं है।हम विकेन्द्रीकरण में विश्वास रखते हैं तो राजनैतिक प्रक्रियाओं की चर्चा भी बुनियादी इकाइयों से शुरु होकर जिला , राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक होगी। केजरीवाल टीम स्वयंसेवी संस्थाओ पर सूचना अधिकार कानून लागू करने के विरुद्ध है। हम सोमनाथ त्रिपाठी के पत्र की इस बात की निन्दा करते हैं जिसमें वह कह रहे हैं कि ‘कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं।राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उन्होंने खुद कहा है सजप को पूरी तरह नए दल में चले जाना चाहिए।
उ.प्र. में साथी विक्रमा मौर्य और सत्येन्द्र यादव को केजरीवाल के दल के प्रति लुभाते हुए इस मुद्दे पर जेपी सिंह ने फोन किया लेकिन राज्य समिति में भाग लेने से वे कतरा गए।
बिहार इकाई के साथी २६ नवम्बर , २०१२ की केजरीवाल की रैली में सजप के झण्डे-बैनर के साथ यदि शामिल हुए तो उससे विलय का भ्रम पैदा होगा इसलिए राष्ट्रीय नेतृत्व को चाहिए उन्हें तत्काल ऐसा न करने के लिए सावधान कर दें ।
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शिवप्रसाद दुबे
अखबारों में योगेन्द्र यादव का नाम देख कर लगा था’हमारे लोग भी लगे हैं।’ १९९५ में जब सजप बनी थी तब भी भारत दलविहीन नहीं था। आज भी दल किसी को रोकता नहीं है । यदि कोई एम.पी-एम.एल.ए बनने के लिए किसी दल में जाते हों तो जाएं। मुलायम सिंह यादव के दल में शामिल होने की पात्रता (आपराधिक पृष्टभूमि) हमारे कार्यकर्ताओं में है ही नहीं ।
हमने वह दौर देखा है जब विष्णुदेवजी ,अफलातूनजी और चंचल मुखर्जी प्रदेश में जम कर दौरा करते थे ।
अन्ना-केजरीवाल के आन्दोलन से जनता कुछ समय के लिए जरूर उत्साहित हुई। प्रान्तीय अध्यक्ष साथी सुभाषचन्द्र जी ने संदीप पाण्डे को साफ शब्दों में कहा था कि बिना राजनीति परिवर्तन संभव नहीं है ।
१७ वर्षों बाद हमारा दल किसी अन्य दल में जाने की बात सोचे भी तो यह मुझे गलत लगता है । घोटालों के खुलासों के दम पर भ्रष्टाचार हट जाएगा यह संभव नहीं है। कुछ लोग अगर यह सोचते हैं तो वे गलत हैं ।
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सत्येन्द्र यादव
७-८ वर्षों से दल से जुड़ा हूं । मेरे राजनैतिक जीवन की शुरुआत यहीं से हुई है। केजरीवाल की नीतियां क्या हैं ? उन्हें हमारे दल में शामिल हो जाना चाहिए। केजरीवाल जन-लोकपाल के दाएरे में NGO को क्यों नहीं चाहते ?
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रामकेवल चौहान (सदस्य,राष्ट्रीय कार्यकारिणी )
जलपाईगुड़ी की राष्ट्रीय परिषद के समय लग रहा था कि पार्टी टूट जाएगी । उस समय सोपा(इंडिया) गठित होने वाली थी ।केजरीवाल का दल १७ महीने भी नहीं चलेगा । उनके काम को देखने के बाद संवाद हो । अगर हमारे साथी केजरीवाल के दल में गये तो वह सीधा सीधा धोखा होगा । विलय का मैं कट्टर विरोधी हूं ।
साथी रामकेवल ने नागपुर में जीरो बजट खेती के शिविर से पहले जेपी सिंह द्वारा बदतमीजी का जिक्र किया।
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रामसरीख विश्वकर्मा
पार्टी के अस्तित्व के पक्ष में खड़ा रहूंगा ।
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जयराम भारती
कुछ निजी कारणों से मेरी सक्रियता में कुछ कमी आई है। दल और संगठन के साथ हूं ।
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विक्रमा मौर्य(संगठन मंत्री)
हमें किसी अन्य दल के विधान को जांचने की जरूरत नहीं । अपने विधान को सामने रख कर सक्रियता से काम करना चाहिए।
हम बरसों से दिन-प्रतिदिन ब्लॉक , तहसील के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते हैं । कार्यकर्ता आंखों की पुतली होते हैं । जेपी सिंह का व्यवहार इस परिभाषा के विपरीत है । उन्होंने फोन पर मुझे केजरीवाल की पार्टी के प्रति प्रोत्साहित करने की निष्फल कोशिश की थी।
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बृजबिहारी मल्ल
केजरीवाल की पार्टी चार दिनों की है ।
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डॉ स्वाति (स्थाई आमंत्रित राष्ट्रीय कार्यकारिणी )
सजप का गठन अचानक हुई किसी घोषणा से नहीं हुआ था। कई सहमना संगठनों ने लम्बे समय तक जरूरी मसलों पर चर्चा-बहस के बाद एक राय कायम की थी । अचानक हुई घोषणा गलत होती है । विचारों के आदान-प्रदान का इस बार अभाव है ।
इस प्रस्तावित दल की सामाजिक-आर्थिक नीतियां अस्पष्ट हैं । सिर्फ मीडिया में छा जाने से व्यवस्था परिवर्तन नहीं होता ।हम अपने विश्लेषण को अंतिम सत्य नहीं मानते इसलिए बराबरी के आधार पर चर्चा के हक में हैं । विचार मिलने पर साथ काम हो सकता है । विलय का तो सवाल ही नहीं उठता । जमीन से जुड़े लोग कार्यकर्ताओं से हमेशा संवाद रखते हैं ।
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चंचल मुखर्जी
अगर दो व्यक्ति IAC से बात के लिए अधिकृत थे तो उसकी रिपोर्ट संगठन को क्यों नहीं दी गई ? यह बात सिर्फ पदाधिकारियों तक क्यों सीमित रही ? हम राजनीति करते हैं कोई मठ नहीं चलाते । हमारी राजनीति में नीतिगत बातों का जरूरी स्थान है। उतावलापन उनमें होता है जो जमीन से जुड़े नहीं होते।
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लालबिहारी राजभर
विष्णुदेवजी ने कहा था ,‘घूस नहीं देकर आओगे तो उस बात के लिए मैं लड़ूंगा।’
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शैलेश (वियुस,आमंत्रित)
” धीरज धरहिं,सो उतरहिं पारा”
रामजनम (महामन्त्री ) -
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जिला/राज्य इकाइयां व्यक्तिवाद और तदर्थवाद से चल रही हैं । मुझे भी टटोला जा रहा था। दल के अध्यक्ष और महामंत्री उसे ठीक से नहीं चला रहे हैं। राष्ट्रीय परिषद के बाद कार्यक्रम हो ।
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रामछबीला साहनी (अध्यक्षता)
हम विलय के पक्ष में नहीं हैं । उस दल से वार्ता कर सकते हैं। झंडा-बैनर के साथ दूसरे दल के कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए।
बैठक में बलिया के साथी सुनील कुमार पाण्डे को राज्य समिति का सदस्य बनाया गया।
रामजनम ने सूचित किया कि २३ से २७ फरवरी देवरिया में जीरो बजट खेती पर शिबिर होगा।
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इस बैठक में सजप-उ.प्र. राज्य समिति ने सर्व सम्मति से निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किया है :
सजप-उ.प्र की यह स्पष्ट मान्यता है कि अरविंद केजरीवाल की प्रस्तावित पार्टी की विभिन्न मसलों पर नीतियां अस्पष्ट और अज्ञात हैं। इस परिस्थिति में दल के साथी यदि सजप के झंडे-बैनर के साथ यदि उनके दल के कार्यक्रम में भाग लेते हैं तो दल का नुकसान होगा।अतः दल के राष्ट्रीय नेतृत्व से यह आग्रह है कि उन साथियों को तत्काल सावधान करें कि वे २६ नवंबर को दल के झंडे-बैनर का प्रयोग न करें।
सजप उ.प्र. ने यह फैसला किया है कि सजप के किसी अन्य दल में विलय का प्रश्न ही नहीं उठना चाहिए। अन्य दल/समूह से दल के संवाद में यह ध्यान रखा जाए कि सजप से अधिक से अधिक लोग इस संवाद में भाग लें । तथा संवाद की सूचना राष्ट्रीय कार्यकारिणी , दल की इकाइयों को समय-समय पर देते रहें ।
सजप उ.प्र प्रस्ताव करती है दल में जान फूंकने के लिए राष्ट्रीय परिषद कार्यक्रम का आवाहन करे।



