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Archive for the ‘Uncategorized’ Category

 पिछला हिस्सा
    ” आप कहेंगे यह कहानी तो पुरानी है । पन्द्रह दिन पहले की घटना बताऊँ ? सोपाला में हमारा एक सम्मेलन था । हमने एक टैक्सीवाले को रोका था , उसे पेशगी भी दी थी । उसने पैसे हजम कर लिए और दर्शन ही नहीं दिए । टांगे वालों की खुशामद की लेकिन [...]

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[ मित्रों , मेरे एक प्रिय चिट्ठाकार को एक अन्य प्रिय चिट्ठेकार (और पत्रकार) ने एक ऐसी जगह बोलने के लिए न्यौता दिया था कि मुझे एक बुनियादी बहस को शुरु करने की गुंजाइश दिखी। मैंने यह घोषित कर दिया था कि मैं ७ दिसम्बर , २००५ को ‘जनसत्ता’ में सम्पादकीय पृष्ट पर छपे मुख्य [...]

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Technorati tags: तेलुगु कहानी, पी.सत्यवती, जे.एल.रेड्डी, telugu, short story, p. satyavati, j.l. reddy
[ समकालीन भारतीय साहित्य के जुलाई - सितंबर १९९५ अंक में यह कहानी प्रकाशित हुई थी । आभार सहित यहाँ प्रस्तुत है । ]
    गृहणी बनने से पहले वह एक लड़की थी । सुशिक्षित , चतुर , व्युत्त्पन्नमति । साथ ही चपल और [...]

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Technorati tags: म.प्र. सुरक्षा अधिनियम, दुरुपयोग, m.p. state security act, misuse
लेख का उत्तरार्ध यहाँ पढ़ें
    जिस कानून के तहत अनुराग-शमीम को जिला बदर करने का नोटिस दिया है , वह आमतौर पर शातिर अपराधियों , खूंखार अपराधी गिरोहों , जुआरियों , वैश्यावृत्ति का अड्डा चलाने वालों आदि के विरुद्ध इस्तेमाल किया जाता है । उनकी श्रेणी [...]

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Technorati tags: blogs, ban, aggregator
पिछले दिनों देबाशीष ने निरंतर पत्रिका के पुराने अंकों के बारे में एक अपील जारी की थी।अगर किसी पाठक ने संभाल कर रखे हों तो उन्हें देबाशीष ने माँगा था । अभी हाल में रविजी ने उन तरीकों के बारे में सूचना दी (कई लोग सूचना को ज्ञान का पर्यायवाची मान लेते हैं) [...]

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Technorati tags: vivekanand, brahminism
    जिनके रुधिर-स्राव से मनुष्यजाति की यह जो कुछ उन्नति हुई है ,उनके गुणों का गान कौन करता है ? लोकजयी धर्मवीर , रणवीर , काव्यवीर , सब की आँखों पर , सब के पूज्य हैं ; परंतु जहाँ कोई नहीं देखता , जहाँ कोई एक वाह वाह भी नहीं करता , [...]

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Technorati tags: gun culture, usa, virginiatech
    अमेरिका में निजी असलहाधारियों की तादाद दुनिया के किसी भी मुल्क से ज्यादा है और हर साल बन्दूक के गोली से मरने वालों की तादाद भी । सालाना ३०,००० लोग । निजी वैध बन्दूकों की तादाद भी २१ करोड़ है ( इनमें एक साथ कई असलहे रखने वाले भी शामिल [...]

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Technorati tags: value_based_politics, kishan patanayak
    राजनीति एक व्यवहार है । जैसे-जैसे किसी राजनैतिक व्यक्ति या समूह की क्षमता और प्रभाव बढ़ने लगता है , उसको अपने आदर्श और नीति का कार्यरूप बतलाना पड़ता है । सिद्धान्त और व्यवहार में तालमेल रखना एक कठिन काम प्रतीत होने लगता है । सत्ता से वह जितना दूर रहेगा [...]

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Technorati tags: consummerist culture, sachchidanand sinha
गत प्रविष्टी से आगे
                                  कृत्रिमता ही जीवन
    कृत्रिम शहरी वातावरण में , जो उपभोक्तावादी संस्कृति का परिवेश है , फूलों की गंध , हरियाली , सूरज , चाँद और खुला आकाश मनुष्य के अनुभव या सौन्दर्यबोध के दायरे से बाहर चले जाते हैं । इनकी जगह कृत्रिम से प्रकाशित एवं [...]

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    हम कह चुके हैं कि चीन में भारत की तुलना में बहुत ज्यादा विदेशी पूंजी का प्रवेश हो रहा है । चीन के एक निर्धारित इलाके में सघन रूप से पूंजीवादी विकास किया जा रहा है । वहाँ आधुनिक उद्योगों का विकास तीव्रता से हो रहा है । उसको देख कर चीन के औद्योगिक भविष्य के बारे [...]

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