भारत भूमि पर विदेशी टापू
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भारत भूमि पर विदेशी टापू : लेखक सुनील , यहाँ पढ़ें
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भारत भूमि पर विदेशी टापू : लेखक सुनील , यहाँ पढ़ें
Posted in globalisation , privatisation, sanctuary, tiger, tribal on December 4, 2006 | No Comments »
साभार : बी.बी.सी.
फ़ैसल मोहम्मद अली
फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल
जंगल पर हक़ जताने का संघर्ष
भारत में ‘बाघ या मानव’ और ‘जंगल या आदिवासी’ की चल रही गर्मागर्म बहस के बीच मध्य प्रदेश के पिपरिया तहसील में आदिवासियों ने अपने अधिकारों की माँग को लेकर ख़ास तरह से विरोध दर्ज किया.
क़रीब पाँच हज़ार की तादाद में पिपरिया [...]
Posted in gandhi, half pant on October 3, 2006 | No Comments »
संजय बेंगाणी के चिट्ठे पर टिप्पणी
गांधी की निन्दा अवश्य करें लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखें :
अपनी आत्मकथा को ‘सत्य के प्रयोग’ कहने वाला यह कहता था कि चूंकि यह प्रयोग है इसलिए यदि मेरे विचारों में एक विषय पर दो परस्पर विरोधी बातें मिलें तो बाद वाली को सही मानना.
जैसे जाति प्रथा के बारे में [...]
Posted in Uncategorized on October 1, 2006 | No Comments »
गांधी जी पंडित नेहरू को (अक्टूबर,१९४५) :
हमारे दृष्टिकोणमें जो भेद है उसके बारे में मैं लिखना चाहता हूं . यदि वह भेद बुनियादी है तब तो जनता को वह मालूम हो जाना चाहिए . उसे (जनताको) अन्धकारमें रखने से हमारे स्वराज्य के कार्य को हानि पहुंचेगी .
गांधी जी नेहरू को (स्वाधीनता के बाद) :
मेरा विश्वास [...]
Posted in Uncategorized on September 26, 2006 | No Comments »
कृपया इस प्रविष्टि को नीचे से ऊपर पढें
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खालीपीली
आसक्त
सिर्फ एक ही बात कहना चाहुंगा ! मातृभाषा का सम्मान जरूरी है। हिन्दी का सम्मान करना चाहिये ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिये। लेकिन इसकी आड मे किसी और भाषा का विरोध सही नही है।
आमतौर पर हिन्दी समर्थक अंग्रेजी विरोध पर उतर आते है जो कि गलत है। [...]
Posted in Uncategorized on September 23, 2006 | No Comments »
अब ‘परिचर्चा’ पर चर्चा को डालने के बाद :
बिल्कुल जी बिल्कुल, रुचि है, आप अपने और गांधीजी के विचारों को पूरी तरह से व्यक्त करदें बाद में इस विषय को आगे बढ़ाते हैं।
सागर चन्द नाहर
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कलम को चलने दें “अफ़लातूनजी”॰॰॰
grjoshee
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अफलातून जी,साधुवाद!! गाँधी जी के भाषा पर विचारों से अवगत कराने के लिये..भाषा की इस उलझन मे [...]
Posted in Uncategorized on September 21, 2006 | No Comments »
हिन्दी दिवस पर मैंने गांधी जी के दो उद्धरण अपने चिट्ठों के अलावा ‘गूगल समूह’ ‘चिट्ठाकार’ पर भी डाले थे.सात लोगों ने चर्चा में विचार व्यक्त किये.अन्तत: यह कहा गया कि बहस को ‘परिचर्चा’ पर डाला जाए.यहां चिट्ठाकार की बहस को दिया जा रहा है.आशा है पाठक बहस को जारी रखेंगे.
From:
अफ़लातून -Date:
Thurs, Sep 14 2006 [...]
Posted in Uncategorized on September 13, 2006 | No Comments »
मेरा यह विश्वास है कि राष्ट्र के जो बालक अपनी मातृभाषा के बजाय दूसरी भाषा में शिक्षा प्राप्त करते हैं , वे आत्महत्या ही करते हैं . यह उन्हें अपने जन्मसिद्ध अधिकार से वंचित करती है . विदेशी माध्यम से बच्चों पर अनावश्यक जोर पडता है . वह उनकी सारी मौलिकता का नाश कर [...]
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मालेगांव में आतंकी घटना के बाद वहां की जनता ने आतंकियों के प्रतिक्रिया फैलाने के मक़सद को अपनी सूझ - बूझ से नाकामयाब कर दिया . उसे सलाम !
इस मौके पर काशी में हुए ऐसे ही काण्ड के बाद ‘ साझा संस्कृति मंच ‘ द्वारा निकाले गये जुलूस में वितरित पर्चे को देना उचित [...]