Posted in Uncategorized on September 23, 2006 | No Comments »
अब ‘परिचर्चा’ पर चर्चा को डालने के बाद :
बिल्कुल जी बिल्कुल, रुचि है, आप अपने और गांधीजी के विचारों को पूरी तरह से व्यक्त करदें बाद में इस विषय को आगे बढ़ाते हैं।
सागर चन्द नाहर
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कलम को चलने दें “अफ़लातूनजी”॰॰॰
grjoshee
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अफलातून जी,साधुवाद!! गाँधी जी के भाषा पर विचारों से अवगत कराने के लिये..भाषा की इस उलझन मे [...]
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Posted in Uncategorized on September 21, 2006 | No Comments »
हिन्दी दिवस पर मैंने गांधी जी के दो उद्धरण अपने चिट्ठों के अलावा ‘गूगल समूह’ ‘चिट्ठाकार’ पर भी डाले थे.सात लोगों ने चर्चा में विचार व्यक्त किये.अन्तत: यह कहा गया कि बहस को ‘परिचर्चा’ पर डाला जाए.यहां चिट्ठाकार की बहस को दिया जा रहा है.आशा है पाठक बहस को जारी रखेंगे.
From:
अफ़लातून -Date:
Thurs, Sep 14 2006 [...]
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Posted in Uncategorized on September 13, 2006 | 1 Comment »
मेरा यह विश्वास है कि राष्ट्र के जो बालक अपनी मातृभाषा के बजाय दूसरी भाषा में शिक्षा प्राप्त करते हैं , वे आत्महत्या ही करते हैं . यह उन्हें अपने जन्मसिद्ध अधिकार से वंचित करती है . विदेशी माध्यम से बच्चों पर अनावश्यक जोर पडता है . वह उनकी सारी मौलिकता का नाश कर [...]
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Posted in Uncategorized on September 11, 2006 | No Comments »
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मालेगांव में आतंकी घटना के बाद वहां की जनता ने आतंकियों के प्रतिक्रिया फैलाने के मक़सद को अपनी सूझ - बूझ से नाकामयाब कर दिया . उसे सलाम !
इस मौके पर काशी में हुए ऐसे ही काण्ड के बाद ‘ साझा संस्कृति मंच ‘ द्वारा निकाले गये जुलूस में वितरित पर्चे को देना उचित [...]
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Posted in Uncategorized on August 29, 2006 | 1 Comment »
साधारणतया मौन अच्छा है,
किन्तु मनन के लिए .
जब शोर हो,
चारो ओर सत्य के हनन के लिए,
तब तुम्हे अपनी बात ज्वलन्त शब्दों में कहनी चाहिए.
सिर कटाना पडे या न पडे,
तैय्यारी तो उसकी रहनी चाहिए .
–भवानी प्रसाद मिश्र
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