गाँधी : क्या आप मुझे यह साबित कर सकते हैं कि आपको उन्हें सड़क का इस्तेमाल करने से रोकने का हक है ? मुझे यह बात पक्की तौर पर लगती है कि इन दलित वर्गों के लोगों को सड़क के इस्तेमाल का आप जितना ही हक है । नम्बूदरी प्रतिनिधि : महात्माजी , आप इन [...]
Archive for the ‘water’ Category
केरल में राष्ट्रीय आन्दोलन की याद में
Posted in ambedkar, कपड़ा नीति, blue gold, colas, consumerism, corporatisation, dharma chikitsa, globalisation, Kerala, khadi, water, women, tagged aflatoon, ambedkar, gandhi, george joseph, keshav menon, madhavan, Mathrubhumi, mayalamma, Temple-entry, Travancore, Vaikom, veerendrakumar on फ़रवरी 19, 2010 | 1 Comment »
कोका कोला का प्रवक्ता कांग्रेसी उम्मीदवार
Posted in blue gold, colas, consumerism, election, environment, tribal, water, tagged coca cola, pepsi cola, plachimada, water guzzling plants on मार्च 30, 2009 | 14 Comments »
भारत के मध्यम वर्ग को आकर्षित करने वाला , फाँय – फाँय अंग्रेजी बोलने वाला और अँग्रेजी में सोचने वाला शशि थरूर । पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र के महासचिव पद की होड़ में भी शरीक होने पर एक भारतीय मूल का व्यक्ति होने के नाते ज्यादातर भारतीयों की सहानुभूति बटोरने वाला ! संयुक्त [...]
कोला कम्पनियों द्वाराश्रमिकों की हत्या , उत्पीड़न
Posted in colas, corporatisation, water on फ़रवरी 2, 2008 | 4 Comments »
Technorati tags: कोला कम्पनियाँ, कोकाकोला, पेप्सी, श्रमिक हत्या इन दोनों बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा गरीब देशों की इकाइयों में मजदूरों के साथ अत्यन्त अमानवीय कृत्य किए जाते हैं . दक्षिण अमेरिकी देश कोलोम्बिया में कोका – कोला कम्पनी द्वारा अपने मजदूरों पर दमन और अत्याचार सर्वाधिक चर्चित है . कोलोम्बिया की राष्ट्रीय खाद्य – पेय कामगार [...]
‘दो तिहाई आबादी को होगी पानी की किल्लत’
Posted in blue gold, water on फ़रवरी 15, 2007 | 1 Comment »
साभार : - संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अगले बीस वर्षों में दुनिया की दो तिहाई आबादी को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ेगा. संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन का कहना है कि दुनिया की आबादी जिस गति से बढ़ रही है, उससे दोगुनी दर से पानी [...]
प्लाचीमाडा की महिला नेता मायलम्मा
Posted in colas, globalisation , privatisation, obituary, water on जनवरी 7, 2007 | 8 Comments »
” पृथ्वी से अच्छा बरताव करो ।पृथ्वी तुम्हें माँ-बाप ने नहीं दी है,आगे आने वाली पीढियों ने उसे तुम्हे कर्ज के रूप में दिया है ।हमें अपने बच्चों से उधार में मिली है पृथ्वी ।” आधुनिक औद्योगिक सभ्यता के प्रथम शिकार ‘रेड इन्डियन’ लोगों की यह प्रसिद्ध कहावत प्लाचीमाडा के कोका-कोला विरोधी आन्दोलन की [...]
दोषसिद्ध रंगभेद
Posted in colas, water on नवम्बर 22, 2006 | Leave a Comment »
किन्हीं उपभोक्तावादी उत्पाद की निर्माता कम्पनी की मंशा यदि पूरी दुनिया के बाजार पर छा जाने की हो तब क्या वे रंगभेद का पालन कर सकती हैं ? सरसरी तौर पर सोचने पर लगेगा कि वे किसी भी समूह से भेद-भाव करने से बचने का प्रयास करेंगी . लेकिन ऐसा सोचना सच्चाई से परे है. [...]
श्रमिकों की हत्या , उत्पीडन
Posted in colas, water on नवम्बर 21, 2006 | Leave a Comment »
इन दोनों बहुरष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा गरीब देशों की इकाइयों में मजदूरों के साथ अत्यन्त अमानवीय कृत्य किए जाते हैं . दक्षिण अमेरिकी देश कोलोम्बिया में कोका – कोला कम्पनी द्वारा अपने मजदूरों पर दमन और अत्याचार सर्वाधिक चर्चित है . कोलोम्बिया की राष्ट्रीय खाद्य – पेय कामगार यूनियन – सिनालट्राइनाल ( SINALTRAINAL ) के अनुसार [...]
स्कूलों में शीतल पेय
Posted in colas, colas in schools, water on नवम्बर 20, 2006 | Leave a Comment »
बच्चों के स्वास्थ्य पर शीतल पेयों के प्रभाव के सन्दर्भ में अमेरिकी बाल-रोग अकादमी का नीति वक्तव्य के प्रमुख अंश : ” अधिक मात्रा में शीतल पेय पीने से उत्पन्न स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए स्कूल बोर्डों को एहतियात के तौर पर इनकी बिक्री पर रोक लगानी चाहिए.बच्चों की रोजाना खुराक [...]
शैशव में अतिक्रमण
Posted in colas, globalisation , privatisation, water on नवम्बर 20, 2006 | Leave a Comment »
पोषण के हिसाब से निकम्मे बल्कि नुकसानदेह इन उत्पादों के विपणन की रणनीति आक्रामक होती है . हाल के वर्षों में बच्चों के लिए लेखिका जे . के . राउलिंग द्वारा लिखी गई सबसे लोकप्रिय हैरी पॊटर पुस्तकमाला पर आधारित फिल्मों के एकमेव विपणन अधिकार के लिए कोका – कोला ने टाइम वार्नर के आनुषंगिक [...]
