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Posts Tagged ‘हिन्दी कविता’

अयोध्या , १९९२ हे राम , जीवन एक कटु यथार्थ है और तुम एक महाकव्य !                     तुम्हारे बस की नहीं                      उस अविवेक पर विजय                       जिसके दस बीस नहीं                       अब लाखों सिर – लाखों हाथ हैं                        और विवेक भी अब                         न जाने किसके साथ है ।   इससे बड़ा क्या [...]

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प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी अगर समझने की उतनी ही बड़ी जल्दी में नहीं हैं तो जल्दी समझ नहीं पायेंगे कि मैं क्यों जल्दी में हूं ।   जल्दी का जमाना है सब जल्दी में हैं कोई कहीं पहुंचने की जल्दी [...]

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वे हर वक्त पिले रहते हैं इतिहास में अपनी जगह बनाने में   सिर्फ उन्हें मालूम है कितनी जगह है इतिहास में शायद इसीलिए वे एक दूसरे को धकियाते रहते हैं हर वक्त   उनकी धक्कामुक्की मुक्कामुक्की से बनता है उनका इतिहास   इस तरह इतिहास में अपनी जगह बना लेने के बाद वे तय [...]

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