मतगणना नहीं जनगणना में भाग लेना न भूलें

हिन्दी में चिट्ठेकारी करने वाले समस्त मित्रों,
हिन्दी चिट्ठेकारी में फिलहाल सर्च इंजनों की तुलना में ब्लॉगवाणी से अधिक पाठक पहुँचते हैं । ब्लॉगवाणी शुरु करते वक्त मैथिलीजी ने घोषित किया था कि यह प्रकल्प धन्धे के लिए नहीं , हिन्दी के लिए है । यह वचन नहीं उनकी निष्ठा है और उन्होंने इसे निभाया है । नए [...]

चिट्ठेकारी का दूसरा साल

१५ अगस्त २००६ को हिन्दी का चिट्ठा शुरु किया था । एक साल पूरा होने पर मूल्यांकन किया था । इस चिट्ठे पर पिछले साल कुल १२५ पोस्ट और ३४१ टिप्पणीयाँ थीं  , इस साल ७३ पोस्ट लेकिन टिप्पणियाँ ३४१ ही हैं । अन्य दो चिट्ठे : यही है वह जगह पर इस साल ५७ [...]

पत्रकारीय लेखन किस हद तक साहित्य

१. पत्रकारीय लेखन किस हद तक साहित्य है ? : महादेव देसाई
२.  पत्रकारिता दुधारी तलवार
३. खबरों की शुद्धता
४. ” क्या गांधीजी को बिल्लियाँ पसन्द हैं ? ”
५.  ‘ उस नर्तकी से विवाह हेतु ५०० लोग तैयार ‘
६.  हक़ीक़त भी अपमानजनक हो, तब ?
७.  समाचारपत्रों में गन्दगी
 ८. क्या पाठक का लाभ अखबारों की चिन्ता है ?
 ९.  समाचार : व्यापक [...]