इस अहिंसक युद्ध में स्त्रियों का योगदान पुरुषों से कहीं अधिक होगा । स्त्री को अबला कहना अपराध है ; यह पुरुष का स्त्री के प्रति अन्याय है । यदि शक्ति का अर्थ बर्बर शक्ति है तो अवश्य ही स्त्री पुरुष की अपेक्षा कम बर्बर है । यदि शक्ति का अर्थ नैतिक शक्ति है तो स्त्री पुरुष से असंख्यगुनी श्रेष्ठ है । … यदि हमारे अस्तित्व का नियम अहिंसा है तो भविष्य स्त्री के हाथ है । (यंग इण्डिया,१०-४-१९३० )
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दहेज प्रथा को समाप्त करना ही होगा । विवाह अभिवावकों द्वारा पैसे के लेन-देन की व्यवस्था नहीं होना चाहिए । यह प्रथा जाति से गहराई से जुड़ी है । जब तक पसन्दगी जाति विशेष के कुछ सैंकड़े लड़के और लड़कियों तक सीमित रहेगी , यह प्रथा चलती रहेगी ,भले ही उसके खिलाफ कुछ भी बोला जाए । इस बुराई को खत्म करना है तो लड़कों ,लड़कियों और उनके अभिवावकों को जाति बन्धन को तोड़ना होगा । ( हरिजन ,२३-५-’३६ )
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स्कूलों ,कॉलेजों तथा लड़कियों के अभिवावकों के बीच काम करने की आवश्यकता है । अभिवावक लड़कियों को यह सिखाये कि विवाह के लिए पैसे माँगने वाले युवक से शादी करने से वे इन्कार करें । इन अपमानजनक शर्तों पर विवाह से बेहतर है कि वे अविवाहित रह जाएं । विवाह में एक मात्र स्म्मानजक आधार परस्पर प्रेम और परस्पर स्वीकृति होती है । (यंग इण्डिया,२७-६-’२८)
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अबला कहना अपराध है : महात्मा गांधी
Posted in women, tagged abala, dowry, gandhi, women on अक्टूबर 3, 2008 | 10 Comments »
