क्या माओवादियों ने चीन के विकास पर ध्यान दिया ? -सच्चिदानन्द सिन्हा

पिछले भाग से आगे :
वैसे तो यह औद्योगिक व्यवस्था पूंजीवाद द्वारा पैदा की गयी है जिसमें निजी स्वामित्व की प्रधानता है , लेकिन धीरे धीरे उद्योगों का यह ढांचा , जो वृहद कॉर्पोरेशनों के रूप में विकसित हुआ है , पूंजीपतियों के व्यक्तिगत नियन्त्रण से मुक्त हो एक स्वतंत्र स्वरूप धारण करने लगा है और [...]

जयप्रकाश : जन्मजात योद्धा : महात्मा गांधी

गांधीजी की नजर में जेपी
जयप्रकाश जमजात योद्धा है , उसने अपने देश की मुक्ति के लिए सबकुछ का त्याग किया है । परिश्रम और प्रयत्न करने से वह कभी चूकता नहीं । कष्त और यातना सहने की उसकी क्षमता का कोई जवाब नहीं ।
- महात्मा गांधी
यह संघर्ष केवल सीमित उद्देश्यों के लिए नहीं हो [...]

मों ब्लां कलम-कम्पनी से तुषार गांधी ने ७२ लाख रुपये लिए हैं

फाउन्टेन पेन बनाने वाली जर्मन कम्पनी मों ब्लां द्वारा ’डांडी यात्रा से प्रेरित हो कर’ कुल २४१ की संख्या में गांधी-छाप फाउन्टेन पेन बनाने की खबर आप सब जानते हैं । इस कलम की कीमत भारत में ११.३९ लाख है ,यह भी जानते हैं। गांधी के प्रति समझदारी और आदर से [...]

डाक से प्राप्त दो महत्वपूर्ण टिप्पणियों को सलाम

ब्लॉगिंग का एक मूल स्वरूप रोजनामचा लिखने का रहा है । वेब + लॉग में ’लॉग’ के लिए हिन्दी शब्द फादर कामिल बुल्के के अनुसार – रोजनामचा , यात्रा – दैनिकी , कार्य- पंजी भी है । इस हिन्दी सेवी ऋषि की जन्म-शताब्दी वर्ष पर उनके कोश का उपयोग करते हुए ,पुण्य स्मरण [...]

‘हिन्द स्वराज’ का रूप और प्रेस की आजादी पर गांधीजी

जो महत्व कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं के लिए मार्क्स और एंगेल्स के ’कम्युनिस्ट घोषणापत्र’ का है ,बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा लाहौर के जाति तोड़क सम्मेलन(जिसमें आयोजकों ने उन्हें बुलाने के बाद फिर निमन्त्रण वापस ले लिया था) के लिए लिखे गये ’भारत में जाति-प्रथा का उच्छेद’ नामक पुस्तिका का जो महत्व हर [...]

लोगों की एक गंभीर भूल : महात्मा गांधी

” हम एक अरसे से इस बात को मानने के आदी बन गये हैं कि आम जनता को सत्ता या हुकूमत सिर्फ़ धारासभाओं के (विधायिका) जरिये मिलती है । इस खयाल को मैं अपने लोगों की एक गंभीर भूल मानता रहा हूँ । इस भ्रम या भूल की वजह या तो हमारी जड़ता है या [...]

अर्थशास्त्र : मार्क्स और लोहिया से आगे. लेखक सुनील

[ लेखक समाजवादी जनपरिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा अर्थशास्त्री हैं | डा. राममनोहर लोहिया की प्रसिद्ध पुस्तक Marx , Gandhi and Socialism का एक अध्याय है-Economics after Marx |प्रस्तुत आलेख उसके आगे का कथन है | ]
मानव इतिहास के हर दौर में दुनिया को बदलने और बेहतर बनाने की कोशिशें हुई [...]

अर्थशास्त्र , मार्क्स और लोहिया के आगे – सुनील

लेखक समाजवादी जनपरिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा अर्थशास्त्री हैं |डा. राममनोहर लोहिया की प्रसिद्ध पुस्तक Marx , Gandhi and Socialism का एक अध्याय है-Economics after Marx |प्रस्तुत आलेख उसके आगे का कथन है | ]

[ शेष अगली किश्त में ] चित्र पत्र खटका मार कर सेव कर लें , तब पढ़ें ।

ख़िलाफ़त के दौर में

  हिन्दुस्तान लौटने के बाद खिलाफ़त आन्दोलन में साथ दे कर गांधीजी ने राष्ट्रीय स्तर पर कौमी एकता स्थापित करने का प्रथम प्रयास किया था । खुद को आदर्शोन्मुख व्यवहारवादी गिनवाने वाले गांधीजी ने राष्ट्रीय स्तर पर यथासंभव व्यावहारिक बनने का प्रयास किया था । ऐसा करने में उन्होंने स्तुति व निन्दा , लोकप्रियता व [...]

यह सिर्फ़ अफवाह ही हो सकती है कि…

‘ यह सिर्फ अफवाह ही हो सकती है कि सुबह नहीं होगी । ‘ इस सुस्पष्ट हकीकत को बयान करने की जरूरत क्यों पड़ी थी । अफवाह और अफवाह फैलाने वालों की विशिष्टता को समझाने के लिए कवि-मित्र राजेन्द्र राजन द्वारा २४ साल पहले हमारे चुनावी परचे में लिखा गया यह वाक्य कितना प्रभावी था [...]