अयोध्या , १९९२ हे राम , जीवन एक कटु यथार्थ है और तुम एक महाकव्य ! तुम्हारे बस की नहीं उस अविवेक पर विजय जिसके दस बीस नहीं अब लाखों सिर – लाखों हाथ हैं और विवेक भी अब न जाने किसके साथ है । इससे बड़ा क्या [...]
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अयोध्या , १९९२ : कुँवरनारायण
Posted in communalism, poem, ramacharitmaanas, tagged अयोध्या, कुँवरनारायण, हिन्दी कविता, hindi poem, hindi poet, kunwar narayan on दिसम्बर 5, 2008 | 12 Comments »
कुंवर नारायण की तीन कविताएं (ज्ञानपीठ की घोषणा की खुशी में)
Posted in globalisation, industralisation, kunwar narayan, poem, tagged कविता, कुंवर नारायण, ज्ञानपीठ, सामयिक वार्ता, gnanpeeth, hindi, hindi poem, hindi poet, kunwar narayan on नवम्बर 23, 2008 | 10 Comments »
जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी अगर समझने की उतनी ही बड़ी जल्दी में नहीं हैं तो जल्दी समझ नहीं पायेंगे कि मैं क्यों जल्दी में हूं । जल्दी का जमाना है सब जल्दी में हैं कोई कहीं पहुंचने [...]
जल्दी में : कुंवर नारायण
Posted in industralisation, poem, tagged कुंवर नारायण, जल्दी में, हिन्दी कविता, hindi poem, kunwar narayan on जुलाई 19, 2008 | 9 Comments »
प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी अगर समझने की उतनी ही बड़ी जल्दी में नहीं हैं तो जल्दी समझ नहीं पायेंगे कि मैं क्यों जल्दी में हूं । जल्दी का जमाना है सब जल्दी में हैं कोई कहीं पहुंचने की जल्दी [...]
