महादेव देसाई (२) : प्रभाकर माचवे

पिछला भाग । महादेव देसाई का एक सुन्दर वर्णन ‘ हसीदे एदीब ‘ की ‘ इनसाइड इण्डिया’ ( भारत में ) नामक पुस्तक में ‘ रघुवर तुमको मेरी लाज ‘ नाम के चौथे अध्याय में मिलता है । जब वे महात्माजी से बातें कर रहीं थीं , महादेव देसाई नोट ले रहे थे । उन्हीं [...]

तत्वज्ञानी महादेव देसाई : प्रभाकर माचवे

[आठ अगस्त १९४२ को मुम्बई के ग्वालिया टैक के मैदान में अपने ऐतिहासिक भाषण में महात्मा गाँधी ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो - करो या मरो’ का नारा दिया । ९ अगस्त की भोर में महात्मा गाँधी , श्रीमती सरोजनी नायडू और महादेव देसाई को गिरफ़्तार कर पुणे के आगा खाँ महल में बन्द कर दिया [...]

पत्रकारीय लेखन किस हद तक साहित्य

१. पत्रकारीय लेखन किस हद तक साहित्य है ? : महादेव देसाई
२.  पत्रकारिता दुधारी तलवार
३. खबरों की शुद्धता
४. ” क्या गांधीजी को बिल्लियाँ पसन्द हैं ? ”
५.  ‘ उस नर्तकी से विवाह हेतु ५०० लोग तैयार ‘
६.  हक़ीक़त भी अपमानजनक हो, तब ?
७.  समाचारपत्रों में गन्दगी
 ८. क्या पाठक का लाभ अखबारों की चिन्ता है ?
 ९.  समाचार : व्यापक [...]