पिछला भाग । महादेव देसाई का एक सुन्दर वर्णन ‘ हसीदे एदीब ‘ की ‘ इनसाइड इण्डिया’ ( भारत में ) नामक पुस्तक में ‘ रघुवर तुमको मेरी लाज ‘ नाम के चौथे अध्याय में मिलता है । जब वे महात्माजी से बातें कर रहीं थीं , महादेव देसाई नोट ले रहे थे । उन्हीं [...]
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महादेव देसाई (२) : प्रभाकर माचवे
Posted in gandhi, tagged प्रभाकर माचवे, महादेव देसाई, mahadev desai, prabhakar machve on अगस्त 11, 2008 | 4 Comments »
तत्वज्ञानी महादेव देसाई : प्रभाकर माचवे
Posted in gandhi, tagged gandhi, mahadev desai, memoir, prabhakar machve on अगस्त 10, 2008 | 6 Comments »
[आठ अगस्त १९४२ को मुम्बई के ग्वालिया टैक के मैदान में अपने ऐतिहासिक भाषण में महात्मा गाँधी ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो - करो या मरो’ का नारा दिया । ९ अगस्त की भोर में महात्मा गाँधी , श्रीमती सरोजनी नायडू और महादेव देसाई को गिरफ़्तार कर पुणे के आगा खाँ महल में बन्द कर दिया [...]
पत्रकारीय लेखन किस हद तक साहित्य
Posted in journalism, tagged blogging, journalism, literature, mahadev desai on मई 23, 2008 | Leave a Comment »
१. पत्रकारीय लेखन किस हद तक साहित्य है ? : महादेव देसाई २. पत्रकारिता दुधारी तलवार ३. खबरों की शुद्धता ४. ” क्या गांधीजी को बिल्लियाँ पसन्द हैं ? ” ५. ‘ उस नर्तकी से विवाह हेतु ५०० लोग तैयार ‘ ६. हक़ीक़त भी अपमानजनक हो, तब ? ७. समाचारपत्रों में गन्दगी ८. क्या पाठक का लाभ अखबारों की [...]
