दो कविताएं : श्रेय , चिड़िया की आंख , राजेन्द्र राजन

श्रेय
पत्थर अगर तेरहवें प्रहार में टूटा
तो इसलिए टूटा
कि उस पर बारह प्रहार हो चुके थे
 
तेरहवां प्रहार करने वाले को मिला
पत्थर तोड़ने का सारा श्रेय
 
कौन जानता है
बाकी बारह प्रहार किसने किए थे ।
 
चिड़िया की आंख
शुरु से कहा जाता है
सिर्फ चिड़िया की आंख देखो
उसके अलावा कुछ भी नहीं
तभी तुम भेद सकोगे अपना लक्ष्य
 
सबके सब लक्ष्य भेदना चाहते [...]

यह सिर्फ शब्दों से नहीं होगा : राजेन्द्र राजन

शब्दों में चाहे जितना सार हो
मगर बेकार है
शब्दों में चाहे जितना प्यार हो मगर बेकार है
शब्दों में चाहे जितनी करुण पुकार हो
मगर बेकार है
शब्दों में चाहे जितनी धार हो
मगर बेकार है
क्योंकि तुम्हारे सामने लोग नहीं हैं
लोगों की एक दीवार है
जिससे टकराकर
लहूलुहान हो रहे हैं तुम्हारे शब्द

पता नहीं
यह शब्दों की हार है
या बहरों का संसार
कि [...]

शब्द , शब्द को पुकारते हैं : राजेन्द्र राजन

जैसे बीज पुकारता है बीज को
जैसे खोज पुकारती है खोज को
जैसे राह पुकारती है राह को
 शब्द, शब्द को पुकारते हैं

मैं न शब्दों को ढूंढ़ता हूं
न उन्हें गढ़ता हूं
न उन्हें चुनता हूं
न उन्हें सजाता हूं

मैं सिर्फ सुनता हूं
जब शब्द , शब्द को पुकारते हैं
और देखता हूं
शब्द आते हैं
हाथ से हाथ मिलाते
खड़े हो जाते हैं जैसे कोई दीवार [...]