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समाजवादी नेता एवं पूर्व सांसद श्री सुरेन्द्र मोहन का निधन (17 दिसंबर 2010) भारत के समाजवादी आंदोलन एवं जन आंदोलनों के लिए बड़ी क्षति है। उनकी मृत्यु से देश ने एक ईमानदार राजनेता, प्रखर विचारक और समर्पित समाजवादी खो दिया। उन्होंने अपना दीर्घ जीवन समाजवादी आदर्षो के लिए सतत् प्रयास में पूरी तरह समर्पित कर दिया। मृत्यु के एक दिन पहले भी वे जंतर-मंतर पर न्यायिक भ्रष्टाचार के बारे में धरने में शरीक हुए थे। पिछले पखवारे में मुंबई और केरल की यात्रा की थी। 84 वर्ष की उम्र के बाबजूद वे लगातार घूमते रहते थे और अंतिम समय तक सक्रिय रहे। छात्र जीवन से ही स्वाधीनता आंदोलन तथा फिर समाजवादी आंदोलन में वे जुड़ गये थे। वे एक सच्चे कर्मयोगी थे।
श्री सुरेन्द्र मोहन मुंबई से निरंतर प्रकाषित अंग्रेजी साप्ताहिक ‘जनता‘ के संपादक थे। हिन्दी और अंग्रेजी में लगातार लिखते रहते थे। ‘‘सादा जीवन उच्च विचार‘‘ की वे साक्षात मूर्ति थे। डॉ. राममनोहर लोहिया की जन्म शताब्दी आयोजन समिति के वे प्रमुख स्तम्भ थे। वे मजदूर आंदोलन से भी जुड़े थे और देश में मजदूरों व कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन ‘हिन्द मजदूर सभा‘ के प्रमुख सलाहकार थे। कुछ महीने पहले हिन्द मजदूर सभा के प्रमुख नेताओं के साथ दो दिवसीय बैठक का आयोजन उन्होंने किया था जिसमें मजदूर आंदोलन एवं यूनियन कार्यकर्ताओं को समाजवादी विचार से जोड़ने पर विस्तार से चर्चा हुई। देश के विभिन्न जन आंदोलनों से भी उनका नाता था और उनके हर संकट में उनका सहायोग व समर्थन मिलता था।
समाजवादी जन परिषद, किसान आदिवासी संगठन और श्रामिक आदिवासी संगठन उनको हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करते है।
फागराम राजेन्द्र गढ़वाल सुनील
किसान आदिवासी संगठन श्रमिक आदिवासी संगठन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,

