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Archive for जुलाई 3rd, 2008

    गत दस दिनों से कश्मीर घाटी से गुजरने वाले अमरनाथ यात्री ‘जमीन स्थानान्तरण विवाद’ के हिन्सक प्रतिरोध को शायद याद नहीं रखें , याद रखेंगे घाटी के मुसलमानों की गर्मजोशी भरी मेज़बानी को ।

    हिंसा के कारण होटल और भोजनालय बन्द हैं फिर भी उन्हें भोजन और आसरे की तलाश में भटकना नहीं पड़ रहा । मुसलमानों ने उनके लिए सामूहिक रसोई और रात्रि विश्राम का प्रबन्ध कर रखा है ।

    पवित्र गुफ़ा से लौट रहे जिन यात्रियों को पुलिस ने नुनवान और बालताल में रोका था उन्हें भी डलगेट और बूलेवार्ड के ‘लंगर’ देखने के बाद जाने दिया गया है ।

   आम जनता की साम्प्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की बात तो छोड़िए सैय्यद अली शाह गिलानी जैसे कट्टर अलगाववादी नेता भी प्रदर्शनकारियों से कह रहे हैं- ” यात्रियों को नुकसान न पहुँचे , यह इस्लाम के विरुद्ध होगा।’

   ” हमने देखा कि यात्री , महिलाएं और बच्चे यहाँ फँस गए हैं तो हमने फैसला लिया कि हम उनके लिए मुफ़्त भोजन और आश्रय का प्रबन्ध करेंगे। गागरीबल के एक स्वयंसेवक मोहम्मद सलीम ने पीटीआई को कहा ।

   इन लोगों ने आन्दोलन के पाँचवे दिन ‘लंगर’ शुरु किए तथा हर रोज़ करीब २,००० यात्रियों को वे भोजन मुहैय्या करवाते हैं । ” हमने अमरनाथ गुफ़ा से लौट रहे हजारों हिन्दू श्रद्धालुओं को भोजन कराया है ।” सलीम ने कहा ।

    अपने पति तथा बेटों के साथ गुजरात से आईं यात्री शान्तिबाई दो बार स्थानीय लोगों द्वारा मदद किए जाने की याद करती हैं ।

    ” मुझे भगवान शिव की गुफ़ा तक पहुँचने में एक मुसलिम तरुण ने मदद की तथा गुफ़ा से लौटते वक्त भी एक मुसलिम ने हमें भोजन और आश्रय दिया। हमने उन्हें पैसे देने चाहे परन्तु उन्होंने शलीनता से इन्कार किया ।” शान्तिबाई ने कहा ।

      उधमपुर जिले की १२,७५० फुट की उँचाई पर स्थित अमरनाथ गुफ़ा के कठिन सफ़र में दिल्ली के आनन्द जैन के लिए घाटी मानों नख़लिस्तान की भाँति थी ।

सौहार्द की मिसाल

    ” मैं कश्मीरी मुसलमानों का अत्यन्त शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने मुझे और मेरे परिवार को भूख से निजात दिलायी। तीन दिनों के बाद हमें डलगेट के ‘लंगर’ में काएदे का ख़ाना मिला।”उन्होंने कहा।

    दिल्ली से आए अन्य एक यात्री पवन शर्मा ने घाटी के लोगों द्वारा ख़ातिरदारी की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि इन लोगों ने समस्या नहीं पैदा की, इनके द्वारा चुने गए नेताओं ने की है ।

     डलगेट तथा बोलवार्ड के अलावा स्वयंसेवकों ने पहलगाँव तथा बालताल के रास्ते यात्रा की आधार कैम्प पर बने पर्यटन स्वागत केन्द्र पर भी   भोजनालय बनाया है ।  

       प्रदर्शन के हृदय स्थल पर भी स्वयंसेवकों ने ताजी सब्जियाँ , पाँव रोटी तथा दूध वितरित किया ।

   यात्रियों को बालताल ले जा रही एक गाड़ी पर अपवादस्वरूप हुए पथराव के अलावा जंगल की जमीन अमरनाथ श्राइन बोर्ड को हस्तांतरित करने के १० दिनव्यापी विरोध प्रदर्शनों कहीं भी यात्रियों को स्पर्श नहीं किया गया । – पीटीआई ( हिन्दी अनुवाद , अफ़लातून )

 

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