Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for जुलाई 14th, 2008

पिछला भाग  । सूर्य की किरणों में प्रकाश है और ऊष्मा भी है । सूर्य में दोनों साथ रहते हैं , भले ही आप अपनी कल्पना में उन्हें अलग करते हों । तार्किक पृथक्करण करके आप दोनों के विषय में अलग अलग विचार कर सकते हैं । परंतु जहां प्रकाश होता है वहां ऊष्मा उसके साथ होती ही है । यह वस्तु जीवन में भी कई जगह लागू होती है । आप ज्ञान और कर्म को अलग नहीं कर सकते । ज्ञान और कर्म साधक में साथ साथ विद्यमान होते हैं । बुद्धि और भावना के साथ भी ऐसा है । बुद्धि और भावना भी भिन्न नहीं हैं । जहां सच्ची बुद्धि हो , वहां सच्ची भावना होनी ही चाहिए । इन्हें आप अलग नहीं कर सकते । वे एकरूप हैं । ऐसा ही शक्ति और भक्ति की बाबत भी है। यह भी मात्र भिन्न भिन्न शब्द हैं  परन्तु वास्तव में वे एक ही हैं । भक्ति में प्रकाश है और शक्ति में ऊष्मा । दोनों मिल कर एक वस्तु बनती है । जैसे सूर्य में प्रकाश और ऊष्मा एकरूप हैं , वैसे ही जीवन में भी यह सब एकरूपता है । [ जारी ]

Read Full Post »

%d bloggers like this: