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Archive for नवम्बर 21st, 2008

    असंगठित मजदूर

    हमारे देश में मजदूरों की एक बड़ी संख्या असंगठित है । जिसमें खेतीहर मजदूर , हम्माल , निर्माण काम में काम करने वाले मजदूर , घरों -दुकानों में काम करने वाले नौकर , हाथ ठेले वाले एवं अन्य तरह के मजदूर शामिल हैं । इन मजदूरों न तो इतनी मजदूरी मिलती है कि यह ढंग से एक व्यक्ति की कमाई पर अपना घर चला सकें न इन्हें बुढापे में पेंशन का सहारा होता है । इन मजदूरों , नौकरों को कभी भी काम से निकाला जा सकता है । अगर हम हम्मालों के मामले में देखें तो न उनके काम के घंटे तय हैं , न उनके लिए कोई कानून हैं। उन्हें सौ किलो का बोरा उठाना होता है ।

    समाजवादी जनपरिषद न सिर्फ हम्मालों के लिए महाराष्ट्र की तरह एक अलग कानून की मांग करती है बल्कि बाकी असंगठित मजदूरों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कानून बनाने की लड़ाई लड़ रही है । जिससे उन्हें पेंशन , घर के लिए लोन आदि की सुविधा आदि मिले ।

    छठवां वेतन आयोग

    केन्द्र सरका्र ने चुनावी साल में सरकारी कर्मचारियों को खुश करने के नाम पर छठवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू कर दी । इससे केन्द्र सरकार पर २२,१०० करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा और मध्यप्रदेश द्वारा इसे अपने कर्मचारियों को लागू करने से बोझ और बढ़ेगा । प्रदेश के हर एक व्यक्ति पर लगभग ४०० रुपये सालाना का बोझ पड़ेगा। इसके पहले पांचवे वेतन आयोग से इतना ही बोझ पड़ चुका है ।

    समाजवादी जनपरिषद यह मानती है कि सरकार के संसाधन और पूंजी पर देश की सारी जनता का बराबर का हक है इसलिए उसे सिर्फ कर्मचारियों पर न लुटाया जाय । साथ ही मंहगाई को इस तरह से नियंत्रण में रखा जाए और शिक्षा , स्वास्थ्य , बिजली जैसी सुविधा उचित दर पर उपलब्ध हो ।

भ्रष्टाचार के योगीराजों का सफाया

    मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार दिन दूना और रात चौगुना बढ़ता जा रहा है । मंत्री , विधायक , अफसर , दलाल सब मिलकर प्रदेश को लूटने में लगे हैं । पिछले दिनों स्वास्थ्य आयुक्त योगीराज शर्मा जैसे काण्ड सामने आए हैं । योगीराज शर्मा के कारनामे पहले से जगजाहिर थे , लेकिन किसी सरकार ने उस पर कार्यवाही नहीं की । यानी वे भी इस लूट में शामिल थे । वह तो आयकर विभाग का छापा पड़ा तब काकर सरकार कार्यवाही करने को मजबूर हुई ।

    दरअसल ऐसे योगीराज हर विभाग में और हर जिले में बैठे  हैं , जो सरकारों – मन्त्रियों के संरक्षण में पल रहे हैं । खुद मुख्यमन्त्री के डम्पर काण्ड में लिप्त होने की बात उजागर हुई है । जाति प्रमाण पत्र , आय प्रमाण पत्र एवं मूल निवासी प्रमाण पत्र जैसी छोटी सी चीज बनवाने के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं और चार पांच सौ की घूस व दलाली देनी पड़ती है ।

    समाजवादी जनपरिषद मानती है कि भ्रष्टाचार की इस विशाल गंगा को रोकने के लिए अंग्रेजों से विरासत में मिले प्रशासनिक ढाँचे को पूरा बदलना होगा और राजनैतिक इच्छा शक्ति की जरूरत है । सरकार का विकेन्द्रीकरण करना होगा और जनता के ज्यादा नजदीक ले जाना होगा । राजनीति व धनशक्ति का मेल तोड़ना होगा ।योगीराज हो या शिवराज , भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर कड़ी सजा दी जानी होगी ।

स्विस बैंक में बंद पैसा

    स्विस बैंक  विदेशी बैंक है जहाँ दुनिया भर के नेताओं , अमीरों का भ्रष्ताचार से कमाया पैसा जमा है । इसमें भारत के भी अनेक नेता हैं । स्विस बैंक के संगठन द्वारा २००६ में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार भारत के लोगों का १४५६ अरब डॉलर मतलब ७०,००० अरब रुपये। अगर इस राशि को देश में वापस लाया जाये तो हर गरीब आदमी को एक एक लाख रुपए मिल सकते हैं ।

     समाजवादी जनपरिषद स्विस बैंक में बंद देश के पैसे को वापस देश में लाने की माँग करती है ।

[ जारी ]

पिछले भाग : एक  , दोतीन , चार , पाँच

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