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Archive for अप्रैल 9th, 2009

काशी विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से जुड़े़ सभी बहुत फक्र से कहा करते थे कि यहाँ का विद्यार्थी गुंडों को हरा देता है । पूर्व अध्यक्ष और राजनारायण के निकट सहयोगी मार्कण्डेय सिंह के जमाने में गुंडा दामोदर सिंह हो अथवा बाद में मोहन प्रकाश के जमाने में माफ़िया वीरेन्द्र साही का सहयोगी उपेन्द्र विक्रम सिंह अथवा मेरे चुनाव लड़ना शुरु करने पर उपेन्द्र विक्रम का साथी भगवती सिंह – आपराधिक पृष्टभूमि के सभी धुरंधरों को छात्रों ने नकारा ।

मेरे छात्रावास (बिड़ला) का छात्रावास – अध्यक्ष बिना चुनाव के बना राजेन्द्र पहलवान था । उसका बहनोई हिटलर सिंह भी उसी छात्रावास में रहता था । ’हॉस्टल – डे’  पर रंडी का नाच कराने के नाम पर कमरे – कमरे हिटलर चन्दा मांगने निकले ।   मेरे कमरे कमरा नं २८६ में पहुंचे तब मैंने चन्दा देने से इनकार कर दिया ।

हिटलर – ’अभी पांच रुपैय्या नहीं दे रहे हो , कल शाम तक इन्हीं पांवों पर पांच सौ रुपये रखोगे ”

मैं – “रमाकान्त सिंह (उसका वास्तविक नाम यही है) जब पैसा देने से इनकार कर कर दिया तब उसका परिणाम भी झेलने की तैयारी है ।”

इसके बाद राजेन्द्र पहलवान कमरे में पहुंचे और हिटलर को पकड़ कर ले गये । मैंने अपनी लॉबी के अन्य कमरों में भी उस ’सांस्कृतिक – कार्यक्रम’ के लिए चन्दा देने से लड़कों को  मना कर दिया । फलस्वरूप वे मेरी लॉबी को छोड़कर चले गये । अगले दिन परिसर में इस छोटी सी घटना की चर्चा तेजी से फैल गयी । मेरे कमरे में मनोबल बढ़ाने के लिए समाजवादी युवजन राधेश्याम , समाजवादी शिक्षक आनन्द कुमार और छात्र संघ अध्यक्ष मनोज सिन्हा अलग – अलग पहुंचे । उक्त ’सांस्कृतिक कार्यक्रम’ नहीं हुआ और रमाकान्त सिंह ने मुझे नमस्कार करना शुरु कर दिया । यह उलझन वाली बात थी लेकिन हमारे संगठन की इकाई के उद्घाटन के लिए जब हमारे नेता किशन पटनायक ब्रोचा छात्रावास में बोले तब उन्होंने कहा -’गुंडा वह है जो अपने से कमजोर को सताता है और खुद से मजबूत के पांव चाटता है’।

पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख माफ़िया सरगना मोख्तार अन्सारी बनारस से बहुजन समाज पार्टी का उम्मीदवार है । अपराध की दुनिया में उसके प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी बृजेश सिंह का भतीजा सुशील सिंह भी इसी पार्टी का विधायक है । बनारस के अलग अलग मोहल्लों से एक साथ ३० से ४५ के समूह में लोगों को गाजीपुर के जिला कारागार में मोख्तार से मिलाने ले जाया जाता है । जेल से रुपये भी बाँटे जाते हैं।  चुनाव आयोग के निर्देश पर आज उसका स्थानान्तरण कानपुर जेल हुआ है ।

मोख्तार को अपराधियों की ’आचार – संहिता’ की भी परवाह नहीं करता । बनारस के प्रमुख व्यवसाई नन्दकिशोर रुँगटा के अपहरण के बाद उसने फिरौती की मोटी रकम भी वसूली उसके बाद उनकी निर्मम हत्या कर दी थी ।

अक्सर भाषणों में लोग कहते हैं कि अपराधियों की जाति नहीं होती । यह कह कर मानो वे जाति को कोई पुनीत संस्था साबित करना चाहते हैं । जातियों का ध्रुवीकरण हमेशा मजबूतों के लिए होता है । इसलिए मुझे यह कहना ज्यादा उचित लगता है कि अपराधियों की ही जाति होती है । बनारस में तीन प्रमुख सवर्ण उम्मीदवारों के मुकाबले मोख्तार के लिए मुसलिम और दलित के अलावा कुछ पिछड़ों का भी जुड़ाव हो रहा है । बहुजन समाज पार्टी यदि यादवों के बीच सभा कर रही है तो उसके मंच पर पुलिस मुटभेड़ में मारे गये सपा के अपराधी सभासद बाबू यादव की विधवा अथवा एक अन्य मृत अपराधी अभिषेक यादव ’गुड्ड” के स्वजनों को बैठाती है। यानी- बिरादरी के गुंडे का नुकसान मतलब बिरादरी का नुकसान । जातिवाद जाति के प्रति प्रेम से ज्यादा जाति का उपयोग जाति के मजबूत लोगों की स्वार्थ – सिद्धि के लिए करना होता है ।

आज ही बिहार आन्दोलन के एक सिपाही मुजफ़्फ़रपुर के रमण कुमार से भेंट हुई। तिब्बती केन्द्रीय विश्वविद्यालय में चल रहे ’हिन्द स्वराज” की शताब्दी के मौके पर आयोजित एक शिबिर में भाग लेने वे सारनाथ आये हुए हैं । उन्होंने बताया उत्तर प्रदेश की तरह बिहार में भी सहयोगी विहीन कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रत्याशी जुटाने का संकट था इसलिए उसने अपराधियों को थोक में अपना उम्मीदवार बना डाला है ।

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