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Archive for सितम्बर 28th, 2011

शहीद शंकर गुहानियोगी

उनकी हत्या के सप्ताह भर पहले मैं उनके साथ कुछ समय था । होशंगाबाद जिले में गिरफ़्तार हमारे साथी के समर्थन में वे आए थे। होशंगाबाद स्टेशन पर अपना सीधा-सादा एयर बैग पलिटफार्म पर छोड़कर उन्होंने कहा ,’चलो चाय पीते हैं’।मैंने बैग का ध्यान दिलाया तो बोले कि देश भर में इतना भय फैला रखा है कि कोई उसे नहीं छूएगा। हम चाय पीकर आए, बैग ज्यों का त्यों था। वैसे भी उसमें किताबें और एक जोड़ा कपड़ा था। उन्हें मुख्यमन्त्री सुन्दरलाल पटवा से मिलना था। मुख्यमन्त्री के सचिव ने नाम लिख लेने के बाद कहा,’पद-वद बताइए’। नियोगी ने तत्काल अत्यन्त सहजता से कहा,’बता देना गुहा और नियोगी’। पूंजीपतियों द्वारा कराई गई हत्या के दिन भी इस शेर के कमरे की खि्ड़की खुली थी । दल्ली राजहरा के असंगठित मजदूरों को जब भिलाई स्टील प्लान्ट के मजदूर के बराबर मजदूरी दिलाई तब हड़ताल को मुख्य ताकत किसान संगठन द्वारा दिए गए राशन से मिलती ्थी। वेतन बढ़ा तब दो अक्टूबर के दिन २०-२५ हजार मजदूरों ्की रै्ली में नियोगी ने कहा कि शराब पीने के पक्ष में आकर लोग बोलें। फिर अन्त में समझाया कि बढ़ा वेतन दारू कीमत अदा करने में फिर उन्हीं उद्योगपतियों के पास न चला जाए। उनक यूनियन ने शानदार ’शहीद अस्पताल ’ बनाया । विनायक सेन उसके पहले डाक्टरों में थे। विधायक बनाने वाली पहली यूनियन। शहीद नियोगी- लाल जोहार ।

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