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Archive for अक्टूबर, 2013

समाजवादी जनपरिषद
राष्ट्रीय परिपत्र सं. ०२ / २०१३

                                                                                                           दिनांक अक्टूबर ११ , २०१३

प्रिय साथी ,
खादी परिसर , कन्हौली, मुजफ्फरपुर में ८-९ अक्टूबर २०१३ को सजप की राष्त्रीय कार्यकारिणी की बैठक सम्पन्न हुई । इसी जगह दिनांक ६ से ८ अक्टूबर को विद्यार्थी युवजन सभा का राष्ट्रीय शिबिर तथा सम्मेलन भी सम्पन्न हुआ। कार्यकारिणी की बैठक में साथी जोशी जेकब,कमल बनर्जी,लिंगराज,शिवाजी गायकवाड़,सुनील,निशा शिवूरकर,रणजीत,लिंगराज आजाद,अफलातून,बालेश्वर प्रसाद,राधाकांत बहिदार,डॉ स्वाति,संतू भाई संत, नवल किशोर सिंह,सुधाकरराव देशमुख,सरयू प्रसाद सिंह,बालकृष्ण संढ,रामकेवल चौहान,सच्चिदानन्द सिन्हा,विश्वनाथ बागी,अखिला,नरेन्द्र सिंह,नवीन,जगतनारायण,रणजीत,अरमा

न, तथा शिवली ने भाग लिया।

विभिन्न राज्यों तथा वि.यु.स की रपट प्रस्तुत की गई। मऊ,उ.प्र के दल के वरिष्ट साथी बृजबिहारी मल्ल की मृत्यु तथा महाराष्ट्र के अंधश्रद्धा निर्मूलन नेता डॉ नरेन्द्र दाभोलकर की हत्या पर शोक प्रस्ताव पारित किए गए। मौजूदा आर्थिक राजनैतिक स्थिति पर तफसील से चर्चा के बाद सर्वसम्मति प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव संलग्न है ।
आगामी दिनों में होने वाले विधान सभा के चुनावों में सजप मध्य प्रदेश के चार जिलों की चार सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।इस बाबत राज्य समिति शीघ्र निर्णय लेगी।
महाराष्ट्र तथा ओड़ीशा में राज्य स्तरीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिबिर संपन्न हुए हैं। साथी निशा शिवूरकर तथा शिवाजी गायकवाड़ ने सूचित किया कि ‘किशन पटनायक ट्रस्ट’ के गठन का काम शुरु किया जा चुका है।इसके मसविदे को पढ़कर विचार देने के लिए उन्होंने निवेदन किया।
वि.यु.स के शिबिर/सम्मेलन के विशेष सत्र में नियमगिरी सुरक्षा आन्दोलन से जुड़े दल के साथी राजकिशोर,राष्ट्रीय सचिव लिंगराज आजाद तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का सार्वजनिक सम्मान किया गया। पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. महेन्द्र कर्ण इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे तथा वरिष्त साथी विश्वनाथ बागी ने अध्यक्षता की ।
फैसला हुआ कि दल के अभिलेख,रजिस्टर इत्यादि अफलातून व चंचल मुखर्जी डॉ सोमनाथ त्रिपाठी से प्राप्त करेंगे। बैंक खाता स्थान्तरण हेतु भी डॉ सोमनाथ त्रिपाठी से यह दोनों साथी बात करेंगे।
कर्नाटक की युवा समाजवादी अधिवक्ता साथी अखिला ने दल की सदस्यता ग्रहण की है । उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी का निमन्त्रित सदस्य बनाया गया। दल के वरिष्ट साथी चंचल मुखर्जी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्थायी निमन्त्रित होंगे। राष्ट्रीय महामंत्री सुनील ने आवाहन किया कि दल के दस हजार सदस्य बनाये जांए ।
अक्टूबर २,२०१३ से मार्च ८ , २०१४ तक महिला केन्द्रित कार्यक्रम लेने का फैसला राष्ट्रीय सम्मेलन में हुआ था। कार्यकारिणी की इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि इस अवधि में हर जिला इकाई नर-नारी समता के मुद्दे पर एक शिविर आयोजित करेगी जिसमें पुरुष साथियों के अलावा महिला साथियों की अच्छी भागीदारी का प्रयास करना होगा। इसी अभियान के तहत जनवरी३ ,२०१४ को सावित्रीबाई फुळे की जयन्ती के मौके पर स्त्री-शिक्षा पर केन्द्रित कार्यक्रम लिए जाएंगे। दलित-स्त्री उत्पीड़न पर निशा शिवूरकर शीघ्र एक नोट प्रसारित करेंगी।
नीचे लिखी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं –
महाराष्ट्र ;उ.प्र -सुनील,  ओड़ीशा; – कमल बनर्जी,रणजीत,  बिहार-कमल बनर्जी,रणजीत,चंचल मु

खर्जी   झारखण्ड;किसान मोर्चा-लिंगराज ,  दक्षिण भारत – जोशी जेकब,  असंगठित मजदूर- सुभाष लोमटे   पूर्वोत्तर राज्य – कमल बनर्जी,   म.प्र.;केरल; महिला मोर्चा – निशा शिवूरकर,  शिवाजी गायकवाड-गोआ, आन्ध्र प्रदेश;दलित आदिवासी मोर्चा;विस्थापित आन्दोलन – लिंगराज आजाद,    दिल्ली;पश्चिम बंग; वि.यु.स. – अफलातून ।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अगली बैठक कर्नाटक में १०,११,१२ जनवरी २०१४ को होगी ।
कृपया परिपत्र मिलने की सूचना पोस्ट कार्ड द्वारा अवश्य दीजिए।अपने अपने राज्यों के अध्यक्ष-महामंत्री के पते/फोन मुझे भेजें तथा राज्य समिति के सदस्यों की पतों सहित सूची संगठन मंत्री को भेजें । सभी कार्यक्रमों की रपट राष्ट्रीय कार्यालय (राजनारायण स्मृति भवन,ग्रा/पोस्ट केसला,वाया इटारसी,जि होशंगाबाद,म.प्र – ४६११११) को भेजें।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ,
आपका,
अफलातून.
राष्ट्रीय सचिव, ५ रीडर आवास,जोधपुर कॉलोनी,काशी विश्वविद्यालाय,वाराणसी-२२१००५. (उ.प्र.)

देश व दुनिया के हालात पर प्रस्ताव ,समाजवादी जनपरिषद राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक 8-9 अक्टूबर 2013, मुजफ्फरपुर (बिहार)

देश व दुनिया के हालात पर प्रस्तावसमाजवादी जनपरिषद राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक 8-9 अक्टूबर 2013, मुजफ्फरपुर (बिहार),    डाॅलर की तुलना में रूपये का मूल्य में तेज गिरावट रूपी लक्षण के माध्यम से भारत का गंभीर आर्थिक संकट हाल में प्रकट हुआ। देश फिर एक बार 1991 जैसी हालात के कगार पर है इस तरह की चर्चा भी होने लगी। लेकिन बाद में मामूली सुधार के आधार पर केन्द्र सरकार की ओर से यह अहसास पैदा करने की कोशिश हो रही है कि सब कुछ सामान्य हो जाएगा। वास्तव में देश की गंभीर आर्थिक हालत आज भी बरकरार है। देश के विदेशी व्यापार के भुगतान संतुलन में जो जबरदस्त घाटा पैदा हो चुका है, इस संकट का यह एक मूल कारण है। विगत दो दशकों से उदारीकरण-भूमंडलीकरण के नाम पर जो नीतियां चलायी गयीं, उसके एक तार्किक नतीजे के रूप में इस संकट को देखा जा सकता है। देश के बाजार को विदेशी पूंजी व विदेशी कंपनियों के लिए संपूर्ण मुक्त कर निर्यात बढ़ावे की मृग मरीचिका के पीछे दौड़ने का फलस्वरूप विदेशी व्यापार के चालू खाते में घाटा बढ़ता गया एवं सरकार द्वारा विदेशी कर्ज और विदेशी पूंजी के जरिए उसको ढ़कने का नतीजा आज का मूल संकट है। विश्व बैंक-मुद्रा कोष निर्देशित इन नीतियों के नतीजों से सबक लेकर देश को इस संकट से उबारने की वैकल्पिक नीति के बारे में सोचने के बजाय मुद्राकोष के पूर्व पदाधिकारी वफादार अर्थशास्त्री प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह उसी विचार के अपनी अर्थशास्त्री टोली के सहारे उन्हीं नीतियों को और तेज करने पर तुले हुए हैं। मनमोहन सिंह के नक्शे कदम पर मुद्राकोष में पदाधिकारी बनकर अमेरीका का राष्ट्रपति के भी आर्थिक सलाहकार के रूप में काम करने के बाद लौटे हाल में भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर बनाए गए रघुराम राजन को इस संकट का तारणहार के रूप में पेश किया जा रहा है। समाजवादी जनपरिषद का स्पष्ट मत है कि जिन आर्थिक नीतियों के चलते आज का संकट गहराया है उन्हीं नीतियों को और तेज करने से यह संकट और घनीभूत होगा। स0ज0प0 की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का मानना है कि इस विदेशी कर्ज और विदेशी पूंजी पर निर्भर आर्थिक नीति को त्याग कर एक वैकल्पिक विकास माॅडल के साथ देश हित में स्वावलम्बी आर्थिक नीति अपनाने से ही देश इस गंभीर संकट से निजात पा सकता है।     देश जब न सिर्फ विदेशी व्यापार के क्षेत्र में इस तरह का आर्थिक संकट से जूझ रहा है, बल्कि देश की आम जनता उसके ही परिणाम स्वरूप गंभीर रोजमर्रा समस्याओं का सामना कर रही हैं, तब देश का प्रमुख विपक्षी दल भा0ज0पा0 नरेंद्र मोदी को अपने प्रधान मंत्री के रूप में पेश करने बाद वही पुरानी हिन्दूत्ववादी कार्ड खेल कर आगामी विधान सभा और लोकसभा चुनाव में जनमानस को गोलबंद करने की रणनीति के साथ उतर चुकी है। शासक कांग्रेस दल भी नरेंद्र मोदी को एक सांप्रदायिक खलनायक के रूप में हमला करते हुए देश में राजनैतिक बहस को सेक्यूलारवाद बनाम सांप्रदायिकता में केन्द्रीत करने की राणनीति को आजमा रही है। देश के दूसरे स्थापित दल भी इसी कृत्रिम वाद बहस के ईदगिर्द मोर्चाबंदी में लग गए हैं। इस तरह का राजनैतिक धु्रवीकरण का माहौल भी 1991 के दौर की स्थिति की याद को ताजा करता है। जब देश ड़ंकल प्रस्ताव को अपना कर एक नयी गुलामी का चक्रव्यूह में फंसने जा रहा था, तब इसी विचारधारा की ताकतें बाबरी मस्जिद- राममंदिर का दंगल को तीव्र कर आम जनता को सांप्रदायिक तनाव की आग में झोंकने का काम कर रही थी। राजनीति के तथाकथित गैर-सांप्रदायिक ताकतों ने इसी को सबसे बड़ा खतरा बताकर देश की अर्थ व्यवस्था को नयी गुलामी की ओर ढ़केलने में मदद की थी। नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में पेश किए जाने का भाजपा के निर्णय के बाद उसके दाहिने हाथ माने जाने वाले अमित शाह को उ0प्र0 का प्रभारी बनाया गया एवं उनके मागदर्शन में उ0प्र0 में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की सुनियोजित साजिश जारी है। इसी के तहत अयोध्या से 84 कोसी यात्रा निकालने की असफल कोशिश हुई। बाद में पश्चिम उ0प्र0 के मुजफ्फरनगर इलाके में जाठ-मुसलमान सांप्रदायिक सदभाव को समाप्त करने के लिए जो कोशिश चल रही थी, उसके भयंकर परिणाम के रूप में हाल का दंगा हुआ। गाँव-गाँव दंगा फैल गया एवं बड़ी संख्या में मासूम मुसलमान मारे गए। जो भारतीय किसान यूनियन एक जमाने में सांप्रदायिक सदभाव का वाहक माना जाता था वह भी इस आगजनी में शामिल हो गया। यह एक बहुत ही चिंताजनक घटना है। समाजवादी जनपरिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी आगामी लोकसभा चुनाव को नरेन्द्र मोदी बनाम राहुल गांधी के रूप में पेश करने की नूरा कुश्ती को भारतीय लोकतंत्र के प्रति एक मजाक मानती है एवं आम जनता से अपील करती है कि इन राजनैतिक दलों की साजिश को समझें तथा देश व जनता जूझ रही बुनियादी समस्याओं को चुनाव का केन्द्रीय मुद्दा बनाने के लिए दबाव बनाएं।     नव-उदारवाद के इस युग में देश के ज्यादातर स्थापित राजनैतिक दलों में न सिर्फ आर्थिक व विकास नीति के स्तर पर बल्कि चरित्र के स्तर पर भी वे समान बन चुके हैं। विगत कुछ दशकों में चुनाव राजनीति पर धन बल और बाहुबल का बोलबाला भयंकर बढ़ गया है। संसद और विधान सभाओं तथा अन्य निर्वाचित निकायों में पूँजीपतियों तथा अपराधी तत्वों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हो चुका है। उसके चलते देश का लोकतंत्र पर खतरा मंडरा रहा है। सभी स्तर पर भ्रष्टाचार का राज कायम हो चुका है। ऐसी परिस्थिति में जब बिगड़ती स्थिति को सुधारने के लिए देश के प्रमुख राजनैतिक दलों तथा संसद या विधान सभाओं से कोई पहल का संकेत नहीं मिल रहा है, तब देश का सर्वोच्च न्यायालय से एक के बाद एक राय के जरिए कानूनी व्याख्या/हस्तक्षेप से आम जनता में कुछ उम्मीद जगाने वाली घटनाएं हो रही है। दागी विधायकों तथा सांसदों को अयोग्य घोषित करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट की राय उसका ताजा और अहम उदाहरण है। इस राय को निरस्त करने के लिए विभिन्न दलों के दबाव से केन्द्र सरकार की ओर से एक अध्यादेश जारी किया गया था। लेकिन एक नाटकीय घटनाक्रम में (राहुल गांधी द्वारा उसे ‘बकवास’ करार देने के बाद) उस अध्यादेश को वापस लिया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट की राय को निरस्त करने के लिए सरकार के अध्यादेश के बाद जो जन भावना उमड़ रही थी उसका दबाव इस वापसी के निर्णय के पीछे अवश्य है। कुछ ही दिन पहले जब केन्द्रीय सूचना आयोग ने सभी बड़े राजनैतिक दलों को सूचना अधिकार कानून के दायरे में लाने संबंधी राय दी थी, तब सभी दलों ने सर्वसम्मति से कानून में प्रावधान कर उसे निरस्त कर दिया था। इस बीच सुप्रीम कोर्ट की एक राय के तहत वोट देते वक्त सभी प्रत्याशियों को नकारने का अधिकार ;त्पहीज जव त्मरमबजद्ध को कानूनी दर्जा दे दिया है। इस छोटे से प्रावधान से भले ही कोई विशेष गुणात्मक फर्क होने वाला नहीं है, राजनैतिक दलों पर सही उम्मीदवार खड़े करने के लिए दबाव का एक औजार बना सकता है। समाजवादी जनपरिषद राष्ट्रीय कार्यकारिणी सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जा रही सकारात्मक कानूनी हस्तक्षेप को स्वागत करती है और देश के सभी स्थापित राजनैतिक दलों को आव्हान करती है कि देश में लोकतंत्र को मजबूत व बेहेतर करने संबंधी आवश्यक सुधारों के बारे में वे भी पहल करें, वरना न्यायिक सक्रियता का यह सिलसिला संसद की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है।     गत 18 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की जिस ऐतिहासिक राय के तहत ओडि़शा के कालाहांडि-रायगढ जिले स्थित नियमगिरि पर्वत के 12 गाँव में अगस्त-सितम्बर माह में जिला जज की निगरानी में पल्ली सभा/ग्राम सभा का आयोजन हुआ एवं उस क्षेत्र के आदिवासी/परंपरागत वनवासी लोगों को नियमगिरि में वेदांत कंपनी का बाक्साईट प्रोजेक्ट को सर्वसम्मति से नकारने का मौका मिला वह भारत के जन आंदोलनों के इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना है। गत दस सालों से नियमगिरि सुरक्षा समिति के नेतृत्व में जारी मौजूदा गलत व जनविरोधी विकास माॅडल को चुनौती देने वाले इस आंदोलन में लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई करने वालों की धारा की एक महत्वपूर्ण जीत लगती है। इस आंदोलन में ओडि़शा के समाजवादी जनपरिषद के कार्यकर्ताओं का एक नेतृत्वकारी भूमिका होने को लेकर स0ज0प0 को फक्र है। कुछ साल पूर्व महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में प्रस्तावित रिलांयस कंपनी का एक एस0ई0जेड0 के खिलाफ जनआंदोलन के दरम्यान वहाँ की राज्य सरकार ने जनमत संग्रह करवाने का निर्णय लिया था और लोगों ने उस प्रोजेक्ट को बहुमत से नकार दिया था। जन आंदोलनों के दबाव से सरकार कभी कभार लोगों की राय को सुन रही है। वरना लगभग सभी जगह विकास और उद्योगीकरण के नाम पर छल बल का प्रयोग कर सरकारों ने आम जनता को कुचलने को ही अपना ‘राजधर्म’ मान लिया है। समाजवादी जनपरिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी नियमगिरि सुरक्षा आंदोलन की इस सफलता के लिए वहां की संघर्षशील जनता को सलाम करती है एवं सभी सरकारों से मांग करती है कोई भी प्रोजेक्ट लागु करने से पहले न सिर्फ अनुसूचित क्षेत्रों में बल्कि सभी जगह ग्रामसभा की राय को सर्वोपरि माना जाए।     गत संसद सत्र में पारित ‘भू अधिग्रहण, पुनर्वास और पुरस्थापन में न्याय और स्वच्छता कानून, 2013’ (संक्षेप में भूमि अधिग्रहण कानून) को केन्द्र सरकार एक प्रगतिशील कानून के रूप में प्रचार कर रही है। केन्द्र पंचायतीराण मंत्री जयराम रमेश दावा कर रहे हैं कि इस कानून से माओवादी समस्या का हल निकलेगा तथा विभिन्न प्रोजेक्टों के द्वारा विस्थापित लोगों का असंतोष घट जाएगा। 70 से 80 प्रतिशत लोगों की सहमति को अनिवार्य मानना एवं स्थानीय दर का 4 गुना मुआवजा देने का प्रावधान को बहुत प्रचार किया जा रहा है। लेकिन गौरतलब बात है कि यह कानून भी सिंचाई, हाइवे जैसे केई प्रोजेक्टों में लागू नहीं होगा। म0प्र0 के मुख्यमंत्री शिवराज चैहान के सुझाव पर तो भा0ज0पा0 ने सिंचाई परियोजना में इस कानून को लागु को नहीं करने का संशोधन को नए कानून में प्रावधान कर दिया है, जबकि सबसे ज्यादा लोग सिंचाई परियोजनाओं में विस्थापित होते हैं। स0प0प0 राष्ट्रीय कार्यकारिणी की स्पष्ट राय है कि इस नए कानून में न्याय और स्वच्छता’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया हो जनता के लिए यह एक ढकोसला है और कंपनियों के लिए भूअधिग्रहण को सुगम किया गया है।     समाजवादी जनपरिषद शुरू से ही जन आकांक्षा के अनुरूप तथा बेहतर राजकाज की दृष्टि से छोटे राज्यों का हिमायती रहा है। लेकिन गत दस सालों से जनता को धोखा देते हुए आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व घोर राजनैतिक अवसरवादिता का प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने तेलंगाना राज्य गठन का जो निर्णय लिया है वह देश के व्यापक हित के अनुकूल नहीं है। तेलेंगना राज्य अवश्य बनाना चाहिए। लेकिन जिस गैर जिम्मेदाराना ढंग से इसका निर्णय लिया गया है, उससे आंध्र प्रदेश के शेष हिस्सों में प्रतिक्रिया के रूप में आंदोलन उभर गए है। स0ज0प0की राष्ट्रीय कार्यकारिणी कांग्रेस दल व यू0पी0ए0 सरकार की इस अवसरवादी रवैये की निंदा करती है एवं मांग करती है कि देश में अलग-अलग राज्यों की माँग के मद्देनजर एक राज्य पुनर्गठन आयोग का निर्माण हो और उसके सिफारिश के आधार पर नए राज्यों का गठन हो।     गत 20 अगस्त को महाराष्ट्र के जाने माने तर्कवादी समाज सुधारक डा0 नरेन्द्र दाभोलकर की हत्या की स0ज0प0 राष्ट्रीय कार्यकारिणी कड़े शब्दों में निंदा करती है एवं रोष प्रकट करते हुए इस हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को पकड़कर सख्त दण्ड देने की मांग करती है। ‘अन्धश्रद्धा उन्मूलन समिति’ के माध्यम से जनता में चेतना जगाते हुए डा0 दाभोलकर एक कड़ा कानून बनाने के लिए सरकार पर दबाव डालते रहे। यह एक विडंबना की बात है कि उनकी शहादत के बाद ही महाराष्ट्र राज्य सरकार ने विगत 20 सालों से लंबित इस संबंधी बिल को एक अध्यादेश के माध्यम से लागू किया। भारत जैसे एक सामंती व पिछड़ी चेतना वाले समाज में अंध विश्वास के व्यापक प्रभाव को समाप्त करने के लिए डा0 दाभोलकर द्वारा आजीवन चलाए गए मुहिम को जारी रखने के लिए स0ज0प0 की राष्ट्रीय कार्यकारिणी संकल्प लेती है।     समाजिक व आर्थिक असुरक्षा का मानसिक कमजोरी का फायदा उठाकर आम जनता की धार्मिक भावना को उकसाकर देश के कोने-कोने में बाबाओं/ माताओं का प्रवचन और पाखण्ड का साम्राज्य इस समय तेजी से फलफूल रहा है। आध्यात्मिकता/धार्मिकता के नाम पर भौतिक व्यसन का चकाचैंध देखने को मिल रहा है। ऐसे माहौल मेें अच्छी संख्या में अनुयायी बनाए हुए आसाराम बापू के ऊपर एक किशारी द्वारा दुष्कर्म के आरोप के बाद गिरफ्तारी व जेल भेजा जाना एक स्वागत योग्य कदम है। उसी तरह 17 साल पूर्व चारा घोटाले में अभियुक्त बिहार के 2 पूर्व मुख्यमंत्रियों और कई आई0ए0एस0 अफसरों को सी0बी0आई कोर्ट द्वारा दण्डित होने के बाद जेल भेजा जाना आम जनता को आश्वस्त करता है।

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