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Archive for दिसम्बर, 2017

अंग्रेजी हटाओ आंदोलन की स्वर्ण जयंती के अवसर पर प्रबुद्धजन ने निकला कूच मार्च
द सहारा न्यूज ब्यूरो,वाराणसी।
अंग्रेजी हटाओ आंदोलन की स्वर्ण जयंती के अवसर पर भारतीय भाषा को बचाने के लिए बीएचयू के सिंह द्वार से संकल्प कूच ‘‘अंग्रेजी हटाओ, भारतीय भाषा लाओ’ रत्नाकर पार्क पहुंची। इसमें सैकड़ों समाजवादी और प्रबुद्धजन शामिल थे। डा. राममनोहर लोहिया के अंग्रेजी हटाओ आंदोलन से प्रेरणा लेते हुए प्रबुद्धजन के साथ युवाओं का हुजूम भी संकल्प कूच में शामिल हुआ। वर्ष 1967 से 2017 के बीच एक लंबी अवधि के बाद अंग्रेजी हटाओ आंदोलन के बाद इसे दूसरे आंदोलन के रूप में देखा जा सकता है। रविवार को हाथों में नारों की तख्तियां देश मे भारतीय भाषाओं की दुर्गति बयां कर रही थीं। संकल्प कूच रत्नाकर पार्क पहुंच कर सभा में तब्दील हो गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ समाजवादी चिंतक विजय नारायन ने कहा कि इस ऐतिहासिक पार्क में 1967 के दौरान अंग्रेजी के खिलाफ बगावत वाराणसी में दिखी थी। समाजवादी नेता देवव्रत मजूमदार के नेतृत्व में हजारों युवा आंदोलनरत थे। आज विदेशी भाषा ने राष्ट्र की उन्नति का रास्ता रोक दिया है। सरकारें भी भारतीय भाषाओं के प्रति बहुत संवेदनशील नही रहीं। भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र में भाषा की उपेक्षा ने यहां की प्रगति रोक दी। चौधरी राजेन्द्र ने कहा कि देश में ऐसी व्यवस्था आई है कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों ने शिक्षा का पूर्णत: बाजारीकरण कर रखा है। अंग्रेजी पढ़ाने के नाम पर मनमाना फीस वसूलना इनका ध्येय है। जिस वजह से शिक्षा की गुणवत्ता गिरती जा रही है। यहां तक कि भारतीय युवाओं को चिकित्सा और इंजीनियरिंग सहित सभी पाठ्यक्रम अंग्रेजी में होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। निजी कंपनियां, सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं अंग्रेजी को अधिक महत्व दे रही हैं। इसकी वजह से भारतीय भाषाओं में पढ़े युवा अवसरों से वंचित हो रहे है, जिनकी अपनी भाषा पर मजबूत पकड़ है। इस मौके पर देवव्रत मजमूनदार सहित दिवंगत सभी लोगो को श्रद्धांजलि दी गई तथा आंदोलन को आगे गति देने एवं अंग्रेजी स्कूलों का विरोध करने की दिशा में रणनीति तथा आगामी 23 मार्च को लोहिया के जन्मदिन पर एक बड़ा कार्यक्रम निर्धारित किया गया। सभा में डा. गया सिंह, डा. बहादुर यादव, संजीव सिंह, डा. रामाज्ञा शशिधर, डा. विास श्रीवास्तव, डा. प्रभात महान, शिवेंद्र मौर्य, रविन्द्र प्रकाश भारती, विजेंद्र मीणा ने भी विचार व्यक्त किये। डा. महेश विक्रम, डा. स्वाति, डा. नीता चौबे, डा. मुनीजा खान, पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल, कुवंर सुरेश सिंह, श्यामबाबू मौर्य, राजीव मौर्य, आशीष मौर्य, अमन यादव, विनय आदि मौजूद थे। अध्यक्षता विजय नारायन, जबकि संचालन अफलातून ने किया।

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देश का किसान जब अत्यंत कठिन परिस्थिति से गुजर रहा है। गरीबी और कर्ज के बोझ में दबा है। अपनी मेहनत का मोल और उपज के उचित दाम के लिये संघर्ष करने के लिये रास्तेपर उतर रहा है तब किसान को कुछ देने के बजाय केंद्र सरकार ने ऐसी फसल बीमा योजनाएं चला रखी है जिसमें खरीप 2016 और रबी 2016-17 के लिये सरकारी तिजोरी और किसानों की जेब से लूट कर 10 बीमा कंपनियों को 12395 करोड रुपये का लाभ पहुंचाया गया है। जिसके लिये देश में 5.65 करोड किसानों से जबरदस्ती बीमा करवाया गया लेकिन 82.43 प्रतिशत किसानों को किसी प्रकार की मदत नही मिली। जिन 17.57 प्रतिशत किसानों को नुकसान भरपाई मिल पाई है उनमें कई किसान ऐसे है की जिन्हे उनसे वसूले गये बीमा हप्ते से कम राशि मिली है।
केंद्र सरकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी फसल बीमा योजना के खरीप 2016 और रबी 2016-17 में देश भर से किसानों से जबरदस्ती उनके अनुमति के बिना 4231.16 करोड रुपये हप्ता वसूल कर फसल बीमा करवाया गया और किसान बजट से राज्य सरकार के 9137.02 करोड रुपये और केंद्र सरकार के 8949.35 करोड रुपये हप्ता मिलाकर कुल 22318.15 करोड रुपये राशी बीमा कम्पनियों को दी गयी। नुकसान भरपाई के रुप में केवल 9922.78 करोड रुपये नुकसान भरपाई दी गई है। कंपनियों को प्राप्त हुये कुल बीमा राशी के आधा भी किसानों को नही लौटाया गया। किसानों से 12395.37 करोड रुपये रुपये सरकार और बीमा कम्पनियों के मिली भगत से बीमा कम्पनियों ने लूटे है। प्रति किसान लगभग 2200 रुपये कंपनी ने लूट लिये है।
खरीप 2016 में देश भर के किसानों से 2980.10 करोड रुपये हप्ता वसूल कर फसल बीमा करवाया गया और किसान बजट से राज्य सरकार के 6932.38 करोड रुपये और केंद्र सरकार के 6759.72 करोड रुपये हप्ता मिलाकर कुल 16672.20 करोड रुपये बीमा कम्पनियों को दिये गये। नुकसान भरपाई के रुप में किसानों को केवल 8021.68 करोड रुपये नुकसान भरपाई दी गई है।
रबी 2016-17 में देश भर के किसानों से 1251.06 करोड रुपये हप्ता वसूल कर फसल बीमा करवाया गया और किसान बजट से राज्य सरकार के 2204.65 करोड रुपये और केंद्र सरकार के 2189.63 करोड रुपये हप्ता मिलाकर कुल 5645.95 करोड रुपये बीमा कंपनियों को दिये गये। नुकसान भरपाई के रुप में किसानों को केवल 3744.85 करोड रुपये नुकसान भरपाई दी गई है।
महाराष्ट्र में बीमा कंपनियों को सबसे अधिक 4621.05 करोड रुपये बीमा हप्ता प्राप्त हुआ। उसमें से किसानों को केवल 2216.66 करोड रुपये नुकसान भरपाई दी गयी। बाकी सारी रकम 2404.39 करोड रुपये कर्ज के बोझ में दबे किसानों की जेब से सरकार से मिली भगत कर बीमा कम्पनियों ने लूट लिये है।

प्रधानमंत्री फसल बिमा योजना सहीत सभी बीमा योजनाओं में हुयी यह पिछले बीमा योजनाओं से कई गुना अधिक है। नई योजना में निजी बीमा कंपनियों को बीमा क्षेत्र में प्रवेश देना, बैंक से कर्ज लेनेवाले ऋणी किसानों के लिये योजना अनिवार्य कर जबरदस्ती हप्ता वसूलना आदी कई सारे प्रावधान बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिये कानून में किये गये है। इस योजना से स्पष्ट है की कंपनियां और सरकार ने मिलकर योजनापूर्वक किसानों को लूटने का काम किया है। यह साजिसपूर्वक किया गया भ्रष्टाचार है। इसे उजागर करने के लिये बीमा कंपनियों ने किन किन पार्टियों को कितना कितना फंड दिया है इसकी जांच होनी आवश्यक है। यह उल्लेखनीय है कि यह योजना किसानों की आमदनी दोगुणी करने के लिये घोषित योजनाओं में से एक है। किसानों की आय दोगुणी करने के नामपर बनी दूसरी योजनाओं का स्वरुप भी इसी प्रकार का है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत करते समय माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा था की उनकी सरकार गरीबों को समर्पित सरकार हैं। किसान के कल्याण के लिये, किसान का जीवन बदलने के लिये, गांव की आर्थिक स्थिति बदलने के लिये प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लायी गयी है। यह सरकार की ओर से किसानों के लिये तौफा है। यह योजना किसानों के जीवन में बहुत बडा परिवर्तन लायेगी।
लेकिन प्रत्यक्ष में केंद्र सरकार ने उल्टा किया है। देश के किसानों को लूट कर बीमा कंपनीयों को बडा लाभ पहुंचाया है। यह योजना किसानों को लूट कर बीमा कंपनीयों को लाभ पहूंचाने के लिये ही बनाई गई है। किसानों की यह लूट क्रियान्वयन के दोष के कारण नही बल्कि यह योजना तत्वत: किसानों के लूट की व्यवस्था है। जिन राज्य सरकारों ने यह योजना अपने राज्य में लागू नही की उन्हे किसानों को लूट से बचाने के लिये धन्यवाद देने चाहीये। दूसरे राज्यों को भी आगे से किसानों के हित में इस किसान विरोधी योजना का बहिष्कार करना चाहीये।
राष्ट्रीय किसान समन्वय समिति ने की मांग है कि देश के किसानों को लूट कर उनसे वसूला गया बीमा हप्ता किसानों को वापस लौटाया जाए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बंद की जाए और उसके बदले में प्राकृतिक आपदाओं में किसानों को सरकार की तरफ से सिधे नुकसान भरपाई दी जाने की व्यवस्था की जाए।
विवेकानंद माथने,
विवेकानंद माथने
संयोजक
राष्ट्रीय किसान समन्वय समिति
vivekanand.amt@gmail.com
9822994821 / 9422194996

2 Kharif 20163 Rabi 2016-17

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