Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for the ‘election’ Category

प्रेस विज्ञप्ति
केसला, जनवरी 9।
अघोषित छुपा धन समाप्त करने,नकली नोटों को ख़त्म करने तथा आतंकियों के आर्थिक आधार को तोड़ने के घोषित उद्देश्यों को पूरा करने में नोटबंदी का कदम पूरी तरह विफल रहा है। इसके साथ ही इस कदम से छोटे तथा मझोले व्यवसाय व् उद्योगों को जबरदस्त आघात लगा है।महिलाओं, किसानों और मजदूरों तथा आदिवासियों की माली हालत व रोजगार के अवसरों पर भीषण प्रतिकूल असर पड़ा है।इस संकट से उबरने में लंबा समय लग जाएगा।
उपर्युक्त बाते समाजवादी जनपरिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की होशंगाबाद जिले के ग्राम भूमकापुरा में हुई बैठक में देश की वर्तमान परिस्थिति पर पारित प्रस्ताव में कही गयी है।इस प्रस्ताव में कहा गया है कि केंद्र सरकार का ‘नागदीविहीन अर्थव्यवस्था’ का अभियान चंद बड़ी कंपनियों को विशाल बाजार मुहैया कराने के लिए है। प्रस्ताव में कहा गया है कि जमीन, मकान तथा गहनों की खरीद फरोख्त में नागदविहीन लेन देन को अनिवार्य किए जाने से छुपे,अघोषित धन के एक प्रमुख स्रोत पर रोक लगाई जा सकती है परंतु सरकार की ऐसी कोई मंशा दिखाई नहीं दे रही है।
एक अन्य प्रस्ताव में विदेशों से गेहूं के आयात पर आयात शुल्क पूरी तरह हटा लिए जाने की घोर निंदा की गयी तथा समस्त किसान संगठनों से आवाहन किया गया कि इस निर्णय का पुरजोर विरोध करें।
दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने भारत के चुनाव आयोग से मांग की है कि पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनावों के पूर्व आम बजट पेश करने पर रोक लगाए।आयोग को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि आगामी 31 मार्च 2017 के पूर्व बजट पेश करना गैर जरूरी है तथा यह चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित करेगा।
दल का आगामी राष्ट्रीय सम्मलेन 29,30 अप्रैल तथा 1मई को पश्चिम बंग के जलपाईगुड़ी में होगा।सम्मलेन में नौ राज्यों के 250 प्रतिनिधि भाग लेंगे।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मुख्यत: निशा शिवूरकर,संतू भाई संत,विक्रमा मौर्य, राजेंद्र गढवाल, रामकेवल चौहान,अनुराग मोदी,फागराम,अखिला,रणजीत राय,अफलातून,स्मिता,डॉ स्वाति आदि ने भाग लिया।अध्यक्षता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जोशी जेकब ने की।
प्रेषक,
अफलातून,
राष्ट्रीय संगठन मंत्री,समाजवादी जनपरिषद।

Read Full Post »

बेतूल से सजप उम्मीदवार फागराम

बेतूल से सजप उम्मीदवार फागराम


क्योंकि

भ्रष्ट नेता और अफसरों कि आँख कि किरकिरी बना- कई बार जेल गया; कई झूठे केसो का सामना किया!
· आदिवासी होकर नई राजनीति की बात करता है; भाजप, कांग्रेस, यहाँ तक आम-आदमी और जैसी स्थापित पार्टी से नहीं जुड़ा है!
· आदिवासी, दलित, मुस्लिमों और गरीबों को स्थापित पार्टी के बड़े नेताओं का पिठ्ठू बने बिना राजनीति में आने का हक़ नहीं है!
· असली आम-आदमी है: मजदूर; सातवी पास; कच्चे मकान में रहता है; दो एकड़ जमीन पर पेट पलने वाला!
· १९९५ में समय समाजवादी जन परिषद के साथ आम-आदमी कि बदलाव की राजनीति का सपना देखा; जिसे, कल-तक जनसंगठनो के अधिकांश कार्यकर्ता अछूत मानते थे!
· बिना किसी बड़े नेता के पिठ्ठू बने: १९९४ में २२ साल में अपने गाँव का पंच बना; उसके बाद जनपद सदस्य (ब्लाक) फिर अगले पांच साल में जनपद उपाध्यक्ष, और वर्तमान में होशंगाबाद जिला पंचायत सदस्य और जिला योजना समीति सदस्य बना !
· चार-बार सामान्य सीट से विधानसभा-सभा चुनाव लड़ १० हजार तक मत पा चुका है!

जिन्हें लगता है- फागराम का साथ देना है: वो प्रचार में आ सकते है; उसके और पार्टी के बारे में लिख सकते है; चंदा भेज सकते है, सजप रजिस्टर्ड पार्टी है, इसलिए चंदे में आयकर पर झूठ मिलेगी. बैतूल, म. प्र. में २४ अप्रैल को चुनाव है. सम्पर्क: फागराम- 7869717160 राजेन्द्र गढ़वाल- 9424471101, सुनील 9425040452, अनुराग 9425041624 Visit us at https://samatavadi.wordpress.com

समाजवादी जन परिषद, श्रमिक आदिवासी जनसंगठन, किसान आदिवासी जनसंगठन

Read Full Post »

प्रेस विज्ञप्ति

    चेन्नापट्टना (कर्नाटक)
    जनवरी १२, २०१४.
    वेदान्त कम्पनी को ओड़ीशा के नियमगिरी में बॉक्साइट खनन के लिए दी गई मंजूरी कॉर्पोरेट हितों पर जनता की जीत है । सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर नियमगिरी की १२ ग्राम सभाओं के आदिवासियों द्वारा सर्वसम्मति से इंग्लैण्ड की खनन कम्पनी वेदांत के विरोध में जनमत व्यक्त किया गया था । इस आन्दोलन में समाजवादी जनपरिषद ने अहम भूमिका अदा की । नियमगिरी और देश भर की जनता की इस जीत से हौसला अफजाई हुई है ।
    कर्नाटक के रामनगर जिले के चेन्नापट्टना तालुका के अर्रालाल्लासान्द्रा गांव में १० से १२ जनवरी सजप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें नियमगिरी के आदिवासियों को बधाई दी गई ।
    स ज प ने फैसला लिया है कि जगतीकरण और कंपनी राज तथा सांप्रदायिकता को परास्त करने के लिए आगामी लोकसभा चुनाव सजप हस्तक्षेप करेगी । इसके लिए सजप आम आदमी पार्टी तथा सहमना दलों से सहयोग मांगेगी ।
    स ज प यह महसूस करती है कि कांग्रेस तथा भाजपा के नेत्रृत्व वाले मोर्चों से देश को बचाना इस वक्त हमारा प्रमुख कार्यभार है। सजप पांच राज्यों की नौ लोकसभा सीटों तथा ओडीशा की दो विधान सभा सीटों पर प्रत्याशी खड़े करेगी।
    सजप ने तय किया है कि गैर बराबरी , भेदभाव ,अन्याय तथा कट्टरतावाद के आधार पर चल रही व्यवस्था में समग्र बदलाव लाने के लिए सक्रिय शक्तियों को मजबूत किया जाए । स ज प यह भी महसूस करती है कि जातिभेद , लिंग भेद के साथ चलने वाली मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था ही जन जीवन के विभिन्न संकटों का मूल कारण है । सजप ने भ्रष्टाचार की मूल कारणों को उजागर करने वाले कार्यक्रम लेने का निर्णय किया है । दल ने यह भी तय किया है कि ‘२१वीं सदी में समाजवाद’ विषयक एक अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित कियाअ जाएगा ।
    प्रेषक ,
    (सुनील)
    राष्ट्रीय महामंत्री ,
    समाजवादी जनपरिषद.

Read Full Post »

वाराणसी कैंट विधान-सभा क्षेत्र से समाजवादी जनपरिषद (प्रत्याशी – अफलातून ) का चुनाव-खर्च व आय

चुनाव खर्च हेतु चन्दा

डॉ बी. के. यादव                     1000

जगनारायण सिंह                  1000

राजेन्द्र                                    2000

डॉ के के मिश्रा                          1000

प्रो . विपिन  त्रिपाठी                                 500

डॉ श्रीकृष्ण सिंह                                        500

अजीत सिंह                             5000

रमेश गिनोडिया                      11000

चचा                                         25 ,000

नचिकेता                                  10 ,000

अनूप सर्राफ                             28 ,800

दल                                           10 ,000

डॉ अशोक अग्रवाल                     5 ,000

जीतेंद्र गुप्ता                              11 ,000

अशोक सेकसरिया                     4000

डॉ राजीव                                   11 ,000

अनिल त्रिपाठी                            5000

महेश पांडे                                    5000

डॉ संघमित्रा                             11 ,000

विनोद सिंह (WNT)                    500

पवन कुमार                                1000

डॉ स्वाति                                      1400

दीपक पटेल                                     500

डॉ आई एस गंभीर                       2000

_______________________________

कुल आय                           1,72200

खर्च

नुक्कड़ सभाएं (आठ )          21 ,940

परचा -स्टीकर                         6019

वाहन – इंधन                         28 ,869 .20

बैनर-झंडा                             1436

पार्टी   कार्यकर्ताओं का दौरा      2468

कार्यकर्ताओं पर व्यय                13000

जमानत राशि                           10000

अन्य फुटकर खर्च                      1952

__________________________________

कुल खर्च                                       85 ,684

__________________________________

हमारी मांग थी की चुनावी तंत्र हर उम्मीदवार को एक हिसाबनावीस मुहैया कराए । आयोग तो जब मानेगा तब मानेगा लेकिन दल के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ सोमनाथ त्रिपाठी ने स्वयं यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई ।

Read Full Post »

हम यह मान कर चले थे की आम जनता खुद से राजनीति को काफी दूर महसूस करने लगी है । राजनीति का मकसद जब स्पष्ट होता है तब समाज का हर तबका उससे जुड़ जाता है । राष्ट्रीय आन्दोलन के दौर में समाज का हर तबका राजनीति से जुड़ गया था क्योंकि उसका मकसद स्पष्ट था – देश को गुलामी के जुए से मुक्त कराना । हमने सोचा था कि चुनाव लड़कर आम आदमी को राजनीति से जोड़ने की कोशिश करेंगे । समाजवादी जनपरिषद की  राजनीति का मकसद है नई राजनैतिक संस्कृति की स्थापना । लगभग सवा तीन लाख मतदाताओं के विधान सभा क्षेत्र में समाजवादी जनपरिषद के प्रत्याशी के रूप में मुझे मात्र ६३२ वोट मिले । जाति , सम्प्रदाय , पैसे के आधार पर राजनीति की मुख्यधारा के दलों से जुड़ना अधिकतर लोगों ने पसंद किया । लोगबाग प्रचलित राजनीति से मजबूती से जुड़े हैं । मुख्यधारा के दल राजनीति का जो भी उद्देश्य लेकर चल रहे हैं जनता को उससे परहेज नहीं है ।  लोगों में हमारी राजनीति के प्रति यकीन पैदा करने के लिए जो न्यूनतम ताकत आवश्यक है वह हम नहीं जुटा पाए हैं ।

हमें  मिले वोट अललटप्पू ढंग से नहीं पड़े थे । जिन इलाकों में दल का काम था अथवा साथियों का निजी संपर्क था वहीं से यह वोट आए । गिने – गिनाए । हमारे संभावित मतदाताओं पर नोंच-खसोट भी हुई , जिसे रोकने के लिए हमने प्रयास नहीं किए थे । जिस छोटे से क्षेत्र में हमारे दल ने काम किया था और पहचान भी थी उसके बाहर कम समय देने पर कुछ वोट बढ़ जाते।

एक मित्र ने सही कहा कि लड़ नहीं पाए लेकिन ललकारा तो खूब ! इस बार सर्वाधिक नुक्कड़ सभाएं हमने ही कीं । बड़े दलों के बड़े नेताओं की रैलियाँ हुईं  लेकिन नुक्कड़ सभाएं बिलकुल नहीं हुईं । १३ दिनों के लिए रखे गए एक वाहन के खर्च के बाद सबसे बड़ा खर्च नुक्कड़ सभाओं पर ही हुआ । हमारे परचे भी पसंद किए गए ।

पुरे चुनाव में यह हमेशा लगा कि तीसरी शक्ति के फलने-फूलने की  गुंजाइश है । वैश्वीकरण की आर्थिक नीतियों व् साम्प्रदायिकता के विरुद्ध और सामाजिक न्याय के हक़ में खड़ी होने वाली तीसरी शक्ति । इस ताकत को खडा करने में  राजनैतिक रूप से सचेत युवा और महिला संगठन बहुत कारगर साबित होंगे । वर्ग संगठनों की मजबूती होने पर लोग उस शक्ति को आपका आधार मान लेते हैं । ऐसा आधार जाति-सम्प्रदाय के आधार से बेहतर है ।

करीब एक लाख रुपये चुनाव में खर्च हुए । चन्दा इससे कुछ अधिक हुआ । चंदे का बड़ा हिस्सा बनारस के बाहर रहने वाले मित्रों से आया । १९७७ में मेरे साथ स्कूल पास करके जो मित्र निकले थे उनका सहयोग अधिक था ।

चुनाव-तंत्र की कमियाँ उजागर हुईं ।यह कमी थी – जायज चुनावी खर्च का फालतू  छिद्रान्वेषण और नाजायज खर्च रोक पानी में पूरी विफलता । दलों द्वारा चुनाव खर्च की कोई सीमा निर्धारित नहीं है।  कांग्रेस  ने उम्मीदवारों को खर्च की अधिकतम सीमा (१६ लाख रूपए) से दुगने ज्यादा रकम प्रत्येक प्रत्याशी को दी थी ।  राजनैतिक समझ के अभाव में चुनाव तंत्र सुधार के नाम पर ऐसे कई कदम उठाता है जो छोटे दलों के विरुद्ध तथा भ्रष्ट राजनीति के पक्ष में होते हैं । लोकतंत्र का यह आवश्यक पर्व धारा १४४ के तहत नियंत्रित था।चार से अधिक लोगों के इकट्ठे होकर कुछ भी सार्वजनिक तौर पर करने के लिए पुलिस और प्रशासन से अनुमति लीजिए । गैर – मान्यताप्राप्त दलों के लिए मात्र १५ दिन प्रचार के लिए मिलते हैं । इन छोटे दलों को चुनाव चिह्न भी  इस पखवाड़े के शुरुआत में ही मिलता है । इस अवधि में तीन बार चुनाव-   खर्च बताने रिटर्निंग अफसर के दफ्तर जाना पड़ता है । खर्च – प्रेक्षक का आग्रह था की जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित दरों पर ही खर्च दिखाया जाए , भले ही वास्तव में वह उससे कम या ज्यादा हो । इस प्रकार चुनाव – तंत्र झूट बोलने का आग्रह करता है। 

मीडिया की भूमिका पक्षपातपूर्ण , मुनाफाखोर और अलोकतांत्रिक थी । पिछले चुनाव में ‘पेड़ न्यूज’ की काफी चर्चा हो गई थी। हमने भी चुनाव आयोग और प्रेस परिषद् में शिकायत दर्ज कराई थी। इस बार इसकी निगरानी के लिए जिला-स्तर पर एक समिति बना दी गई थी । मनमानी  खबरें  पैसे लेकर छापने में कुछ कमी जरूर आई । इसकी भरपाई  बड़े अखबारों ने हर प्रत्याशी से पचीस हजार रुपये लेकर और छोटे अखबारों ने पंद्रह हजार रूपए लेकर की । जिन प्रत्याशियों ने  इतना पैसा नहीं दिया उनकी खबरों का ‘ब्लैक आउट ‘ हुआ  । स्थानीय अखबारों के इस रवैये का असर राष्ट्रीय अखबारों पर नहीं था । हिन्दू ,स्टार न्यूज, एनडीटीवी ,आज तक पर हमारी उम्मीदवारी ‘खबर’ मानी गई  – http://www.thehindu.com/news/states/other-states/article2889442.ece  , http://www.youtube.com/watch?v=YfVMi_sWvyI ,

चुनाव के लिए जन संपर्क के दौरान महसूस हुआ कि लोग  प्रत्याशियों की बात बहुत ही ध्यान से सुनते हैं । नई राजनैतिक संस्कृति की बात से प्रभावित होकर जिन मुष्टिमेय लोगों ने वोट दिया उनमें से एक ने बताया कि १९७७ के बाद वे पहली बार वोट देने गए । मुझे याद आया कि मेरे सर्वोदयी पिता पहले चुनाव से ही मतदान की उम्र पार कर चुके थे लेकिन पहली बार वोट देने १९७७ में ही गए थे – कुछ दूर तक कंधे पर हल लिए किसान का जनता पार्टी झंडा उठा कर भी ।

Read Full Post »

जब चुनाव में दलों और उम्मीदवारों की भीड़ है , तब वाराणसी कैंट विधानसभा क्षेत्र से एक और उम्मीदवार – समाजवादी जनपरिषद  के अफलातून – मैदान में क्यों ?

ताकि बुनियादी बदलाव के लिए समर्पित एक नई राजनीति कायम हो सके | जब तक मौजूदा पतनशील , मौक़ा परस्त , स्वार्थी  राजनीति देश पर हावी रहेगी , तब तक कुछ नहीं हो सकता | एक अच्छा लोकपाल क़ानून भी नहीं बन सकता |

ताकि देश में गरीबी , बेरोजगारी , महंगाई फैलाने वाली आर्थिक नीतियों को बदला जा सके | किसानों को आत्महत्या न करना पड़े |

ताकि उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली जा सके , जिससे यहां के नौजवानों को मुंबई और दूसरी जगह दर-दर की ठोकरें न खाना पड़े |

ताकि खुदरा व्यापार सहित जनजीवन के हर क्षेत्र में विदेशी कम्पनियों का हमला रोका जा सके |

ताकि शिक्षा में मुनाफाखोरी , व्यवसायीकरण और भेदभाव के खिलाफ मुहिम चले और सामान स्कूल प्रणाली कायम हो | केजी से पीजी तक सबको मुफ्त , उम्दा तथा सार्थक शिक्षा की सरकारी खर्च पर व्यवस्था बने |

ताकि देश से अंग्रेजी का साम्राज्य ख़त्म हो और हिन्दुस्तानी , बंगला , तमिल,तेलुगु ,भोजपुरी जैसी जनता की भाषाओं में देश का काम चले |

ताकि चिकित्सा का बाजारीकरण और मुनाफाखोरी रुके | पैसे के अभाव में कोई इलाज से वंचित न रहे |

अफलातून

अफलातून


ताकि बनारस , उत्तर प्रदेश व् देश में अमन-चैन बिगाड़ने वाली फिरकापरस्त ताकतों को कमजोर किया जाए |साझी विरासत और गंगा – जमुनी तहजीब की रक्षा करने वाली धारा मजबूत हो |ताकि एक नया भारत बने और शायर इकबाल के शब्दों में हम फिर से फख्र से कह सकें –

सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा

समाजवादी जन परिषद के जुझारू उम्मीदवार म जो जयप्रकाश आंदोलन से लेकर आज तक वैकल्पिक राजनीति के लिए संघर्ष करते रहे हैं

साथी अफलातून को वोट दें , समर्थन दें , जितायें |

Read Full Post »

Gmail अफ़लातून अफ़लू <aflatoon@gmail.com>

चुनाव – खर्च लिपिक


Aflatoon अफ़लातून <aflatoon@gmail.com> 5 February 2012 06:15
To: rksrivastava@eci.gov.in
Bcc: ceo_uttarpradesh@eci.gov.in, vinodzutshi@eci.gov.in, Aj <ajvaranasi@rediffmail.com>, Bharat_HT <bharatkumar_2000u@yahoo.com>, “bvishal@vns.amarujala.com” <bvishal@vns.amarujala.com>, Dainik Jagaran <varanasi@vns.jagran.com>, Gandiv <gandivvns@gmail.com>, Hindustan <htvaranasi@rediffmail.com>, Pioneer_English <rksinghpio@yahoo.co.in>, Rashtriya Sahara <rsvns1@gmail.com>, Sanmarg <sanmargvns1@satyam.net.in>, TOI <binays01@gmail.com>
श्री एस. वाय कुरेशी,
मुख्य चुनाव आयुक्त,
भारत का निर्वाचन आयोग,
नई दिल्ली.
विषय : चुनाव खर्च – ब्योरा ।
माननीय महाशय,
पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त दलों को दो सप्ताह का प्रचार समय मिलता है। इस अवधि में तीन बार वित्तीय प्रेक्षकों के समक्ष जाना तथा तकनीकी ढंग से चुनाव खर्च और चन्दे का ब्योरा रखना बहुत जटिल और अव्यावहारिक प्रक्रिया होती है। खर्च-प्रेक्षक वास्तविक खर्च की बजाए स्थानीय-प्रशासन द्वारा अनुमानित खर्च को लिखने का आग्रह रखते हैं जो असत्य को बढ़ावा देना है । खर्च का अपना अनुमान लगाने के लिए तो वे स्वतंत्र हैं।
भारतीय वित्त सेवा से जुड़े इन प्रेक्षकों को लोकतंत्र और चुनाव के बारे में बुनियादी समझदारी नहीं है। ‘प्रेस विज्ञप्ति’ फोटोस्टैट करने और भेजने के खर्च का उल्लेख करने पर यह कहते हैं ,” आपको विज्ञप्ति जारी करने की क्या आवश्यकता है ?कहीं यह ‘पेड न्यूज’ तो नहीं? ” सिर्फ विज्ञापन देने वाले प्रत्याशियों की खबरे छापने की नीति अपनाने वाले अखबारों के अलोकतांत्रिक आचरण को आपके प्रेक्षक नहीं समझ पाते हैं और इसलिए पकड़ भी नहीं सकते ।
बहरहाल , हमारी चुनाव आयोग से
चुनाव-सुधार की दिशा में मांग है कि आयोग इन पन्द्रह दिनों के लिए हर प्रत्याशी का खर्च रखने के लिए आयोग के खर्च पर प्रशिक्षित हिसाबनवीस रखने की व्यवस्था करे। यह छोटा-सा सुधार चुनाव में शुचिता रखने की दिशा में अत्यन्त महत्वपूर्ण साबित होगा ।
सधन्यवाद,
विनीत,
अफलातून, प्रत्याशी- समाजवादी जन परिषद , 390 वाराणसी कैन्ट वि,स. क्षेत्र


Aflatoon   अफ़लातून ,
समाजवादी जनपरिषद ,
५ , रीडर आवास ,जोधपुर कॉलॉनी,
काशी विश्वविद्यालय , वाराणसी – २२१००५


https://samatavadi.wordpress.com
Phone फोन :  +918004085923



Read Full Post »

Older Posts »

%d bloggers like this: