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Posts Tagged ‘नियमगिरी’

श्री नवीन पटनायक,

मुख्यमंत्री, ओडिशा,

भुवनेश्वर, ओडिशा

 

प्रिय मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक जी,

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बहरहाल, नियमगिरी में अनिल अग्रवाल की इंग्लैण्ड की कम्पनी वेदान्त द्वारा खनन कराने अथवा न कराने के सन्दर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश से तथा न्यायपालिका की देखरेख में जनमत-संग्रह हुआ था जिसमें एक भी वोट वेदान्त द्वारा बॉक्साइट खनन के पक्ष में नहीं पड़ा था। आपकी सरकार से जुड़े माइनिंग कॉर्पोरेशन के अदालत में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को बदलवाने के प्रयास को न्यायपालिका ने अस्वीकार कर दिया है। आपके गृह विभाग को यह भलीभांति पता है कि प्रतिबन्धित भाकपा (माओवादी) ने जनमत संग्रह के बहिष्कार की अपील की थी। जनता ने जैसे वेदान्त द्वारा खनन को पूरी तरह से नकार दिया था, उसी प्रकार माओवादियों द्वारा जनमत-संग्रह बहिष्कार की अपील को भी पूरी तरह नकार दिया था।

इस परिस्थिति में ओडिशा पुलिस द्वारा नियमगिरी सुरक्षा समिति से जुडे कार्यकर्ताओं पर फर्जी मामले लादने और उन्हें ‘आत्मसमर्पणकारी माओवादी’ बताने की कार्रवाई नाटकीय, घृणित और जनमत की अनदेखी करते हुए वेदान्त कम्पनी के निहित स्वार्थ में है।

पुलिस द्वारा कुनी सिकाका की गिरफ्तारी, उसके ससुर तथा नियमगिरी सुरक्षा समिति के नेता श्री दधि पुसिका, दधि के पुत्र श्री जागिली तथा उसके कुछ पड़ोसियों को मीडिया के समक्ष ‘आत्मसमर्पणकारी माओवादी’ बताना ड्रामेबाजी है तथा इसे रोकने के लिए तत्काल आपके हस्तक्षेप की मैं मांग कर रहा हूं। कुनी, उसके ससुर और पड़ोसियों पर से तत्काल सभी मुकदमे हटा लीजिए जो आपकी पुलिस ने फर्जी तरीके से बेशर्मी से लगाए हैं।

इस पत्र के साथ मैं कुनी सिकाका के दो चित्र संलग्न कर रहा हूं। पहला चित्र सितम्बर 2014 में हमारे दल द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में का है जिसमें सर्वोदय नेता स्व. नारायण देसाई द्वारा कुनी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया जा रहा है। दूसरे चित्र में कुनी इस संगोष्ठी को माइक पर संबोधित कर रही है और हमारे दल समाजवादी जन परिषद का बिल्ला लगाये हुए है।

तीसरा चित्र गत वर्ष 5 जून पृथ्‍वी दिवस के अवसर पर नियमगिरी सुरक्षा समिति द्वारा आयोजित खुले अधिवेशन का है। इस कार्यक्रम के मंच पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ पर्यावरण-अधिवक्ता के सामने कुनी बैठी है, मंच पर सुश्री मेधा पाटकर व प्रफुल्ल सामंतराय भी बैठे हैं। मैं भी इस कार्यक्रम में नियमगिरी सुरक्षा समिति द्वारा आमंत्रित था तथा वह चित्र मैंने खींचा है। कार्यक्रम में पूरा पुलिस बन्दोबस्त था तथा आपके खुफिया विभाग के कर्मी भी मौजूद थे।

संसदीय लोकतंत्र, न्यायपालिका और संविधान सम्मत अहिंसक प्रतिकार करने वाली नियमगिरी सुरक्षा समिति को माओवादी करार देने की कुचेष्टा से आपकी सरकार को बचना चाहिए। राज्य की जनता,सर्वोच्च न्यायपालिका और पर्यावरण के हित का सम्मान कीजिए तथा एक अहिंसक आन्दोलन को माओवादी करार देने की आपकी पुलिस की कार्रवाई से बाज आइए।

चूंकि हमारी साथी कुनी सिकाका को गैर कानूनी तरीके से घर से ले जाने में अर्धसैनिक बल भी शामिल था इसलिए इस पत्र की प्रतिलिपि केन्द्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह को भी भेज रहा हूं। इस पत्र को सार्वजनिक भी कर रहा हूं।

 

विनीत,

अफलातून

महामंत्री, समाजवादी जन परिषद

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भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर इंग्लैंड की खनन कंपनी द्वारा नियमगिरी पहाड़ से बॉक्साइट खनन पर उस इलाके की ग्राम सभाओं की रायशुमारी ली गयी।एक भी वोट कंपनी द्वारा खनन के पक्ष में नहीं पड़ा। कंपनियों के हमदर्द नवीन पटनायक और नरेंद्र मोदी के लिए यह बहुत बड़ा झटका था। माओवादियों ने रायशुमारी के बहिष्कार की अपील की थी।आदिवासी ग्रामवासियों ने इसे अनसुना कर पूरे वोट डाले।रायशुमारी जिला सिविल जज की देखरेख में हुई।प्राकृतिक संसाधान पर स्थानीय आबादी का हक़ पुष्ट हुआ।देश के संसाधन कंपनियों को बेचने पर आमादा केंद्र और सूबे की सरकारें चाहती हैं कि इस आंदोलन को माओवादियों के प्रभाव में धकेल दिया जाए ताकि सरकार की बड़ी हिंसा से उसका दमन किया जा सके। 27 फरवरी, 2016 को आंदोलनकारी गाँव के युवा की हत्या के बाद सरकार और सरकार-कंपनी समर्थक मीडिया ने उसे माओवादी घोषित किया।समाजवादी जनपरिषद के राष्ट्रीय महामन्त्री और नियमगिरी आंदोलन के प्रमुख नेता साथी लिंगराज आजाद ने पुलिस अधीक्षक से मिल कर प्रतिवाद किया तब जाकर उसका शव परिवारजनों को मिला।
राज्यों के मानवाधिकार आयोग फर्जी मुठभेड़ में सुरक्षा बल द्वारा की गयी हत्या के मामलों में आम तौर पर कोई कारगर हस्तक्षेप नहीं करते।
घटना के प्रतिवाद में यह ज्ञापन ग्रामवासियों ने राज्य मानवाधिकार आयोग को दिया है।ओड़िया से अनुवाद मेरा है।
समाजवादी जनपरिषद की सभी जिला इकाइयों को साथी सुनील के स्मृति दिन 21 अप्रैल, 2016 को अपने जिला मुख्यालय पर प्रतिकार धरना देना है तथा नवीन पटनायक,नरेंद्र मोदी को विरोध पत्र भेजना है।
ग्रामवासियों का ज्ञापन-
अध्यक्ष,
राज्य मानवाधिकार आयोग-ओडीशा,
भुवनेश्वर।
महाशय,
हम नीचे हस्ताक्षर करने वाले जिला रायगडा, कल्याणसिंहपुर थानान्तर्गत डंगामाटी ग्राम के वासिन्दा हैं। गत 27 फरवरी 2016,शनिवार की सुबह गाँव के 20 वर्षीय युवा मंद काड्राका , पिता लाची काड्राका तथा डंबरू सिकका , पिटा बुटुडु सिकका साथ-साथ गाँव के समीप अस्कटान पडर में स्वलप वृक्ष का रस एकत्र करने गए थे।उसी समय पहले से छुपे सुरक्षा बल द्वारा बिना कुछ पूछे समझे गोली चला कर मंद काड्राका को मार डाला गया।। डंबरू किसी प्रकार जान बचा कर भाग आया।ग्रामवासी जब घटनास्थल पर पहुंचे और मृतक का शव देखना चाहा तो पुलिस वालों ने उन्हें डराया धमकाया और लाश को ढक कर ले गए। पत्र -पत्रिकाओं में प्रकाशित चित्र तथा प्रत्यक्षदर्शी डंबरू द्वारा दी गयी सूचना से हमें पता चला कि यह डंगामाटी का मंद काड्राका था ।
  एक निरीह,निहत्थे डोंगरिया कोंड युवा की सुरक्षा बल द्वारा गोली मार कर की गयी हत्या की बाबत मृतक के भाई ड्रीका काड्राका द्वारा गत 4 मार्च,2016 को कल्याणसिंहपुर थाने में लिखित शिकायत दी गयी थी,जिसकी फ़ोटो नक़ल संलग्न की जा रही है। इस गंभीर मामले की सूचना पुलिस ने प्राथमिकी के तौर पर भी नहीं ली,मुकदमा कायम नहीं किया गया।पुलिस जानबूझकर घटना को अलग रूप देना चाह रही है तथा जिला पुलिस अधीक्षक तथा कलेक्टर भी घटना की निष्पक्ष जांच नहीं करना चाह रहे हैं। उल्लेखनीय है की वेदांत कंपनी द्वारा नियमगिरी पर्वत से बॉक्साइट खनन की योजना के विरोध में हम उस इलाके डोंगरिया कोंड सक्रिय हैं जिसके कारण वेदांत कंपनी, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन हम पर विगत कुछ वर्षों से जो आतंकराज चला रहे है उसी का ताजा उदाहरण यह फर्जी मुठभेड़ है ।
डोंगरिया कोंड जैसी आदिम जाति के एक धार्मिक आयोजन ‘घाटी पर्व’ के मौके पर सरकार और प्रशासन द्वारा यह अमानुषिक गोली काण्ड की घटना सिर्फ हमारे जीवन का अधिकार नहीं अपितु धर्मगत स्वाधीनता को संकुचित करने के लिए भय का वातावरण बनाने के उद्देश्य से अभिप्रेत थी यह मानने के यथेष्ट कारण है।
  इस घटना के सन्दर्भ में आयोग जांच कराके मृतक मंद के परिवार को 50 लाख रूपए क्षतिपूर्ति दे तथा दोषी सुरक्षाकर्मियों पर हत्या का मुकदमा कायम कराए।
इति,
आपके विश्वस्त,
सिकका लद, डंबरू सिकका, प्रमोद सिकका, ड्रेका सिकका,ददि सिकका,हुईका पालू
———————————–
नवीन पटनायक सरकार ने इस बीच फिर से रायशुमारी के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका की थी।न्यायालय ने डोंगरिया कोंड समुदाय की और से प्रसिद्ध वकील संजय पारीख को सुनाने के बाद राज्य सरकार की मांग अस्वीकार की तथा सभी प्रभावितों को पकड़ बनाने का आदेश दिया है।
समाजवादी जनपरिषद की प्रत्येक जिला इकाई साथी सुनील के स्मृति दिवस पर अपने जिला मुख्यालय पर धरना दे,सभा करे तथा जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री ओडीशा तथा प्रधासन मंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपे।
अफलातून
संगठन मंत्री, समाजवादी जनपरिषद

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[ भारत भर में खनिज संपदा के दोहन के लिए सरकार अब दमन पर उतारू हो गई है। मध्यप्रदेश जैसे राज्य तो इस बात पर उतर आए हैं कि प्रदेश के ऐसे जिले जहां पर पूर्णतया शांतिपूर्ण आंदोलन चल रहे हैं उन्हें भी अनावश्यक रूप से नक्सल प्रभावित घोषित कर दिया जाए। प्रस्तुत आलेख सर्वोदय भावना की प्रासंगिकता को विश्लेषित कर रहा है। का.सं.,सप्रेस ]

ओडिशा के वरिष्ठ सर्वोदयी नेता मदनमोहन साहू रोज सुबह टहलते हुए गंधमार्दन पर्वत पर स्थित नृसिंहनाथ और हरिशंकर मन्दिर पर तैनात ओडिशा मिलिटरी पुलिस के जवानों से बतियाने पहुँच जाते थे और उनसे कहते ‘यदि बाल्को कम्पनी खनन करेगी तो उसका इस इलाके की खेती पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जानते हो?‘, ‘इस पहाड़ से निकलने वाले 22 सदा सलिला स्त्रोतों के नष्ट हो जाने पर क्या होगा?‘ तुम्हें पता है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर पाणिग्राही ने‘ भारत के ‘वानस्पतिक सर्वेक्षण के लिए किए गए अध्ययन में पाया था कि इस पहाड़ पर 200 से ज्यादा औषधि वनस्पतियाँ हैं?‘

मदन बाबू इसी पहाड़ के नीचे बने ‘निसर्ग-निवास‘ में अलेख पात्र जैसे गांधीजनों तथा स्वतंत्रता सेनानी के साथ रहते थे। गंधमार्दन बचाओ आन्दोलन के तहत मदन बाबू के प्रतिदिन के इस अहिंसक संवाद का यह असर पड़ा कि पहाड़ के पास से गुजरने वाले कम्पनी के वाहनों को जब महिलाएं और बच्चे रोकते थे तब भी इन जवानों ने दमनात्मक कार्रवाई नहीं की। 1987 में अपने दो बच्चों के साथ जामवती बीजरा नामक आदिवासी महिला जब कम्पनी की दर्जनों चक्कों वाली गाड़ी के सामने लेट गई तो यह आन्दोलन का चरम बिन्दु था।

इस इलाके के लोगों का मानना है कि हनुमान को इसी पहाड़ से घायल लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी ले जानी थी। पहाड़ पर नृसिंहनाथ और हरिशंकर के मन्दिर हैं जिनके दर्शनार्थ पश्चिम ओडिशा और छत्तीसगढ़ से भक्त पहुंचते हैं।

यह इलाका तत्कालीन सम्बलपुर जिले में था। सार्वजनिक क्षेत्र की बाल्को कम्पनी को गंधमार्दन पर्वत से बॉक्साईट खनन की अनुमति दी गई थी। राष्ट्रीय सेवा योजना के लड़के-लड़कियां इलाके के गांवों में घर-घर जाते और ग्रामीणों के मन में प्रस्तावित बॉक्साईट खनन को लेकर जो असंतोष और भय व्याप्त था उसे समझते थे। इस पृष्ठभूमि में अगस्त 1985 में ‘गंधमार्दन सुरक्षा युवा परिषद‘ का गठन हुआ जिसके द्वारा आन्दोलन का संचालन होता था। युवा परिषद में समता संगठन और छात्र-युवा संघर्ष वाहिनी से जुडे़ तरुण थे।

देश की खनिज सम्पदा को बचाने के लिए चला यह पहला जनआन्दोलन था। गंधमार्दन पहाड़ के इलाकों में पर्यावरणीय संतुलन की सुरक्षा इसका प्राथमिक मुद्दा बना। आन्दोलन से जुडे़ समाजवादी चिन्तक किशन पटनायक ने खनन की बाबत कहा था, ‘युद्ध और आधुनिक शान-ओ-शौकत का जीवन यदि अपरिहार्य नहीं है तो बाॅक्साइट का खनन अपरिहार्य कैसे है? एल्युमिनियम के सालाना उत्पादन का कितना बड़ा हिस्सा शस्त्रास्त्रों, वायुयान और धनिकों की चका-चैंध को बढ़ाने में जाता है। यदि हम खनन को घटा कर सौंवे भाग तक ले आयेंगे तब शायद आधुनिक खनन से जुड़ी क्रूरता और चकाचैंध में कुछ कमी आ पायेगी। आदिवासी आधुनिक खनन का प्रतिकार कर रहे हैं तथा गंधमार्दन आन्दोलन में सफल भी हुए हैं। यदि वे घुटने टेक देंगे तो उनका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।‘

बॉक्साइट खनन और विपुल जल-स्त्रोतों का नालबद्ध नाता है। गंधमार्दन सुरक्षा हेतु गठित युवा परिषद के लिंगराज प्रधान को इलाके के एक आदिवासी किसान ने इस पहाड़ी से निकलने वाले 22 सदा सलिला स्त्रोतों के बारे में बताया था। इससे पहले उन्हें खनन से उसका सम्बन्ध पता नही था। गंधमार्दन और नियमगिरी में कई भौगोलिक समानताएं हैं। गंधमार्दन से अंग तथा सुखतेल नामक नदियां निकलती हैं जो आगे जाकर महानदी में मिल जाती हैं।

1992 में देश में उदारीकरण की नीतियों के आगाज के साथ-साथ निजी व बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को देश की बहुमूल्य खनिज सम्पदा सौंपने के लिए कानूनों में परिवर्तन किए गए। गंधमार्दन में सार्वजनिक क्षेत्र की बाल्को कम्पनी को खनन करना था। इस कम्पनी को टाटा तथा कनाड़ा की अलकान तथा अलकोआ कम्पनियों ने खरीद लिया और ओडिशा के रायगढ़ जिले के काशीपुर इलाके में इन तीनों कम्पनियों के संघ ‘उत्कल एल्युमिना‘ ने खनन की ठानी। क्षेत्रीय जनता ने वर्षों तक कम्पनी को अपने इलाके में काम करने से रोके रखा। ओडिशा के बालेश्वर जिले के बालियापाल में मिसाइल टेस्टिंग रेन्ज तथा गंधमार्दन के आन्दोलनों की सफलता से संगठित होने पर सफल होने का आत्मविश्वास लोगों में पैदा हो सका।

1997 में वेदान्त कम्पनी के साथ नियमगिरी पहाड़ पर बॉक्साइट खनन के लिए समझौता हुआ। नियमगिरी पहाड़ की रक्षा के लिए समाजवादी जनपरिषद के युवा कार्यकर्ता लिंगराज आजाद, राजकिशोर और प्रेमलाल की पहल पर ‘नियमगिरी सुरक्षा समिति‘ का गठन हुआ। वेदान्त कम्पनी ने पहली बार आन्दोलन के दमन के लिए खुलकर निजी गुंडा-वाहिनी का गठन किया। समाजवादी जनपरिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लिंगराज प्रधान पर इन गुंड़ों ने दो बार हमला किया। लिंगराज आजाद और राजकिशोर पर भी गुंड़ों का हमला हुआ तथा वे तीन माह तक जेल में निरुद्ध भी रहे। नियमगिरी सुरक्षा समिति की पहल पर दस हजार लोगों ने एक बार मानव श्रृंखला बनाई थी। सरोज मोहंती जैसे कार्यकर्ता भी लम्बे समय तक जेल में रहे।

संघर्ष के इन प्रचलित तरीकों के अलावा दो अन्य मोर्चों पर नियमगिरी बचाने की लड़ाई लड़ी गई। गंधमार्दन बचाओ आन्दोलन के समय इन मोर्चो की आवश्यकता न थी। ये मोर्चे हैं न्यायपालिका तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अभियान।

केन्द्र सरकार नियमगिरी में इंग्लैंड की कम्पनी वेदान्त को खनन का निमंत्रण दे सकती है। समाजवादी जनपरिषद के नेता द्वय लिंगराज प्रधान और लिंगराज आजाद ने ऐसी किसी भी चुनौती को स्वीकार करते हुए ओड़िशा में कही भी वेदान्त द्वारा खनन न होने देने के संकल्प की घोषणा की है। महात्मा गांधी के निकट सहयोगी रहे जे.सी कुमारप्पा ने इस बात पर बल दिया था कि धातु-अयस्कों का निर्यात कतई नहीं होना चाहिए। इसका प्रतिकार भी गांधी के बताये तौर-तरीकों से ही करना होगा। (सर्वोदय प्रेस सर्विस )

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