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किशन पटनायक

किशन पटनायक

 

परसों ( २७ सितम्बर ) मेरे दल के नेता साथी किशन पटनायक की मृत्यु तिथि थी । देश में जो कुहासा और कड़ुवाहट फैलाने की कोशिश हो रही है उससे व्यापक स्तर पर अवसाद फैले यह मुमकिन है । राजनीति करने वालों का एक बुनियादी दायित्व है कि वह लोगों में लोकतंत्र के प्रति बुनियादी यक़ीन को मजबूत करें – किशनजी ने यह सिखाया । देश को हिला देने वाली गत दिनों हुई घटनाओं के बारे में स्पष्टता बहुत जरूरी है ।

    यहाँ प्रस्तुत किशन पटनायक के दो छोटे बयान इस कोहरें , कड़ुवाहट और घुटन को काटने में मददगार होंगे , उम्मीद है । राँची में २९ अगस्त , २००४ को दिए गए व्याख्यान और दिसम्बर १९९२ में लिखा गया सामयिक वार्ता का सम्पादकीय- ‘राष्ट्र के हत्यारों के खिलाफ एक कार्यक्रम’ । राँची के कार्यक्रम में किशनजी ने मेरी किताब ‘कोक-पेप्सी की लूट और पानी की जंग’ का विमोचन भी किया था और ५ दिसम्बर , १९९२ को भी हम झारखण्ड के किसी कार्यक्रम से साथ में रेल से लौट रहे थे। राँची के कार्यक्रम की रपट उनकी मृत्यु के अगले दिन (२८ सितम्बर, २००४, पृष्ट ९ ) के ‘प्रभात खबर’ में भी छपी थी ।

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