आगाज़

साधारणतया मौन अच्‍छा है,
किन्‍तु मनन के लिए .
जब शोर हो,
चारो ओर सत्‍य के हनन के लिए,
तब तुम्‍हे अपनी बात ज्‍वलन्‍त शब्‍दों में कहनी चाहिए.
सिर कटाना पडे या न पडे,
तैय्‍यारी तो उसकी रहनी चाहिए .
–भवानी प्रसाद मिश्र

One Response

  1. भवानी जी की बात हमेशा धारदार होती है.. पढ़ाने के लिये शुक्रिया..

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