Posted on November 25, 2009 by अफ़लातून
कभी कभी हम कोई अच्छा काम करना भी चाहते हैं तब भी यदि हमारी नीयत साफ न हो तो वह प्रयत्न व्यर्थ जाता है। यही सेंगर जी के प्रयास के साथ हुआ। वैसे यह भी मुमकिन है कि वे अच्छा नहीं करना चाहते थे इसीलिए अच्छे उपाय अपना कर उसमें उलझ गये हैं ।
मैं महिला [...]
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Posted on November 3, 2009 by अफ़लातून
यह मणिपुरी कवियत्री और कार्यकर्ता ईरोम शर्मिला चनू की भूख हड़ताल का दसवां साल है । शर्मिला अपने राज्य में पिछले ५१ सालों से लागू आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट , १९५८ ( सैन्य बल विशेष शक्तियाँ कानून , १९५८ ) या ” आफ़्स्पा ” के खिलाफ़ सत्याग्रह कर रही हैं। इस राक्षसी [...]
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Posted on November 2, 2009 by अफ़लातून
नर्मदा बचाओ आन्दोलन का २८ अक्टूबर का ज्ञापन
प्रति,
श्री शिवराजसिंह चौहान,
मुख्यमंत्री,
मध्य प्रदेश शासन,
भोपाल म.प्र.
विषय : इंदिरा सागर परियोजना व औंकारेश्वर बाँध प्रभावितों के पुनर्वास बाबत्
द्वारा : जिला कलेक्टर, खण्डवा, म.प्र.
माननीय,
नर्मदा घाटी में बन रहे इंदिरा सागर और औंकारेश्वर बाँध के हजारों प्रभावित आज
खण्डवा जिला मुख्यालय पर एकत्र होकर नर्मदा घाटी में लाखों प्रभावितों की दुर्दशा की [...]
Filed under: displacement, samajwadi janparishad, women, विस्थापन | Tagged: alok agraval, arrests, आलोक अग्रवाल, खंडवा, चित्तरूपा, दमनचक्र, नर्मदा बचाओ आन्दोलन, रामकुंवर, chittarupa, khandwa, nba, police raid, ramkunwar | 2 Comments »
Posted on November 1, 2009 by अफ़लातून
पिछले भाग से आगे :
वैसे तो यह औद्योगिक व्यवस्था पूंजीवाद द्वारा पैदा की गयी है जिसमें निजी स्वामित्व की प्रधानता है , लेकिन धीरे धीरे उद्योगों का यह ढांचा , जो वृहद कॉर्पोरेशनों के रूप में विकसित हुआ है , पूंजीपतियों के व्यक्तिगत नियन्त्रण से मुक्त हो एक स्वतंत्र स्वरूप धारण करने लगा है और [...]
Filed under: Maoist Ideology, capitalism, consumerism, corporatisation, displacement, gandhi, globalisation, industralisation, jharkhand, samajwadi janparishad, tribal | Tagged: 'limitation of maoist ideology', capitalism, gandhi, mao | 3 Comments »
Posted on October 31, 2009 by अफ़लातून
[ २८ , २९ , ३० अक्टूबर २००९ को धनबाद में समाजवादी जनपरिषद का द्विवार्षिक सम्मेलन सम्पन्न हुआ । सम्मेलन का उद्घाटन दल से जुड़े चिन्तक सच्चिदानन्द सिन्हा ने किया । प्रस्तुत है उनका उद्घाटन भाषण ]
झारखण्ड , जहाँ हम सम्मेलन में बैठे हैं , एक अर्थ में मानव इतिहास की समेकित प्रतिछाया प्रस्तुत करता [...]
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Posted on October 25, 2009 by अफ़लातून
प्रियंकर साहित्य , काम – काज की भाषा और चिट्ठेकारी इन सभी मोर्चों पर हिन्दी-सेवा में लगे हैं । अपने तजुर्बे से उन्हों ने मुझे बताया था कि तदर्थवाद ने हिन्दी का नुकसान किया है । विभूति राय प्रशासनिक अधिकारी रहते हुए सिर्फ़ साहित्य से नहीं जुड़े रहे उनके स्पष्ट , प्रतिबद्ध सामाजिक सरोकार भी [...]
Filed under: blogging, media, politics | Tagged: इलाहाबाद, नामवर, ब्लागिंग, ब्लॉग, ब्लॉगिंग.ब्लाग, वि्भूती, हिन्दी ब्लॉग, हिन्दी ब्लॉगिंग | 26 Comments »
Posted on October 22, 2009 by अफ़लातून
[मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में वन्य प्राणियों के लिए तीन सुरक्षित उद्यान/अभयारण्य बनाए गए है– सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, बोरी अभयारण्य और पचमढ़ी अभयारण्य। तीनों को मिलाकर फिर सतपुड़ा टाईगर रिजर्व बनाया गया है। तीनों के अंदर कुल मिलाकर आदिवासियों के लगभग 75 गांव है और इतने ही गांव बाहर सीमा से लगे हुए है। इन [...]
Filed under: displacement, environment, madhya pradesh, tiger, tribal, विस्थापन | Tagged: adivasi, अभयारण्य, आदिवासी, कोरकू, धाई, नई धाईं, बाघ, बाबा मायाराम, मायाराम, विस्थापन, baba mayaram, bori, displacement, nayi dhain, sanctuary, tiger reserve | 2 Comments »
Posted on October 12, 2009 by अफ़लातून
[ ' खादी की राखी ’ पर मेरी एक पोस्ट पर नीला हार्डीकर ने एक गंभीर टिप्पणी डाक से भेजी थी । इसे मैंने अलग पोस्ट के रूप में प्रकाशित किया था । इसके साथ ही नीलाजी ने ’सिंथेटिक वस्त्रों’ पर एक सुन्दर नोट भी भेजा था। इसे आज प्रकाशित किया जा रहा है । [...]
Filed under: gandhi, khadi, textile policy, women, कपड़ा नीति | Tagged: कपड़ा नीति, खादी, गरीबों का कपड़ा, सिन्थेटिक कपड़े, synthetic cloth | 5 Comments »
Posted on October 11, 2009 by अफ़लातून
गांधीजी की नजर में जेपी
जयप्रकाश जमजात योद्धा है , उसने अपने देश की मुक्ति के लिए सबकुछ का त्याग किया है । परिश्रम और प्रयत्न करने से वह कभी चूकता नहीं । कष्त और यातना सहने की उसकी क्षमता का कोई जवाब नहीं ।
- महात्मा गांधी
यह संघर्ष केवल सीमित उद्देश्यों के लिए नहीं हो [...]
Filed under: jayaprakash narayan | Tagged: गांधी, गांधी मैदान, जयप्रकाश नारायण, जेपी, पटना, सम्पूर्ण क्रान्ति, gandhi, jayaprakash narayan, jp | 2 Comments »
Posted on October 5, 2009 by अफ़लातून
फाउन्टेन पेन बनाने वाली जर्मन कम्पनी मों ब्लां द्वारा ’डांडी यात्रा से प्रेरित हो कर’ कुल २४१ की संख्या में गांधी-छाप फाउन्टेन पेन बनाने की खबर आप सब जानते हैं । इस कलम की कीमत भारत में ११.३९ लाख है ,यह भी जानते हैं। गांधी के प्रति समझदारी और आदर से [...]
Filed under: corporatisation, gandhi | Tagged: bapu, fountain pen, gandhi, gopalkrishna, pen, taj hotel, tushar | 12 Comments »