About: Aflatoon अफ़लातून अफ़लू
- वेबसाईट
- http://samatavadi.wordpress.com/
- Details
- समाजवादी जनपरिषद का पूर्णकालिक राजनैतिक कार्यकर्ता । मुख्यालय - वाराणसी Full-time political worker of Samajwadi Janaparishad ,
Posts by Aflatoon अफ़लातून अफ़लू:
-
अप्रैल 22, 2013 खामोशी को खामोशी का सहारा / राकेश भट्ट / गांधी-मार्ग
-
मार्च 21, 2013 संगठन मंत्री साथी विक्रमा मौर्य पर प्राणघातक हमला/ साथ दीजिए
-
फ़रवरी 4, 2013 विदेशी पूंजी का महाभूत / ले. सुनील
-
जनवरी 5, 2013 बराबरी व पारस्पिक सहयोग से बनेगा विकास का नया मॉडल: सिन्हा
-
नवम्बर 28, 2012 जमीन से न जुड़े लोगों में उतवलापन होता है – चंचल मुखर्जी , सजप नेता
-
नवम्बर 1, 2012 परमाणु बिजली पर नोम चोम्स्की और एक बहस (कुमार सुन्दरम की काजल कुमार से )
-
अक्टूबर 20, 2012 केजरीवाल एण्ड कं के समक्ष आठ सवाल
-
अक्टूबर 4, 2012 यह चूक नहीं महाभूल है , अरविन्द केजरीवाल
-
सितम्बर 26, 2012 वैश्वीकरण विरोधी आन्दोलनकारी प्रोफेसर बनवारीलाल शर्मा नहीं रहे
-
सितम्बर 22, 2012 कविता / तुम थे हमारे समय के राडार / राजेन्द्र राजन
पृष्ठ
Meta
हाल ही की टिप्पणियाँ
ढूँढ़ें
अभिलेख
Top Posts
- भारत और उपभोक्तावादी संस्कृति : उपभोक्तावादी संस्कृति (१०) : सच्चिदानन्द सिन्हा
- उपभोक्तावादी संस्कृति :गुलाम मानसिकता की अफ़ीम : सच्चिदानन्द सिन्हा
- क्या-क्या कहते हैं मेरे चिट्ठों के आंकडे ,अपने पाठकों की बाबत
- पानी की जंग , ले.- मॊड बार्लो , टोनी क्लार्क
- युद्ध पर तीन कविताएँ , एक अनुवाद
- मीडिया और सेक्स-उद्योग की मन्दी और विकृतियाँ
- इंडिया का विकास , भारत की महंगाई (महंगाई के मौजूदा दौर की एक पड़ताल) :ले. सुनील
- प्रेक्षकों को राजनीति की ट्रेनिंग दें और प्रत्याशियों को प्रशिक्षित हिसाबनवीस
- शिवराज सरकार का दमनकारी चेहरा
- 'रक्षा कवच’ क्या दान दे दिया गया है , ममता बनर्जी ?
Top Clicks
- कोई नही
पुराभिलेख
शैशव- वाह ! गिलहरी क्या कहने फ़रवरी 26, 2013वाह ! गिलहरी क्या कहने ! धारीदार कोट पहने । पूंछ बड़ी-सी झबरैली, काली – पीली – मटमैली । डाली – डाली फिरती है , नहीं फिसल कर गिरती है ॥ [ चिल्ड्रेन्स बुक ट्रस्ट की 'नन्हे-मुन्नों के गीत' से … Continue reading → […]
- ‘भारतीय जनता की मां को श्रद्धांजलि / सुभाषचन्द्र बोस’ फ़रवरी 22, 2013पिछले साल किसी ने भारत सरकार से पूछा ,’भारत का कोई राष्ट्रपिता भी है ?’ अधिकारिक तौर पर जवाब मिला कि सरकार ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया। सरकार के जवाब से उत्साहित होकर कुछ लोगों ने इसका खूब प्रचार … Continue reading → […]
- दीवाली पर एक प्रार्थना : अल्लामा इक़बाल नवम्बर 13, 2012लब[1] पे आती है दुआ[2] बनके तमन्ना मेरी ज़िन्दगी शम्मा की सूरत हो ख़ुदाया मेरी दूर दुनिया का मेरे दम से अँधेरा हो जाये हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन … Continue reading → […]
- वाह ! गिलहरी क्या कहने फ़रवरी 26, 2013
यही है वह जगह- कट्टरपन्थी नहीं समझ सकते शांति और तर्क की भाषा : डॉ. असगर अली इंजीनियर मई 15, 2013हाल में समाचारपत्रों में एक अत्यंत दुःखद और चिन्ताजनक खबर छपी, जिसके अनुसार पाकिस्तान में कट्टरपन्थियों ने उनमें से कई महिलाओं को जान से मार दिया जो बच्चों को पोलियो की दवा पिला रही थीं। कट्टरपन्थियों का मानना है कि पोलियो उन्मूलन अभियान, दरअसल, मुसलमानों की आबादी कम करने का अन्तर्राष्ट्रीय षडयन्त्र है। वे ऐसा […] […]
- सांग्ती घाटी की शान्ति अप्रैल 22, 2013दिरांग के सरकारी टूरिस्ट लॉज को आज-कल निजी हाथों में दे दिया गया है। उसके मालिक से जब हमने आस-पास की अन्य देखने लायक जगहों के बारे में पूछा तो उसने गरम पानी का सोता,याक शोध संस्थान और सांग्ती घाटी और वहां का भेड़-फार्म बताया । बोमदिला से तवांग जाने वाली मुख्य सड़क पर दिरांग […] […]
- अरुणाचल प्रदेश में दुर्गम पथ-निर्माता अप्रैल 10, 2013भालुकपोंग से तवांग के रास्ते को गुगल-मैप पर देख कर ही मेरी हालत खराब हो रही थी। यह सड़क जम्मू से श्रीनगर अथवा हिमाचल प्रदेश की मनाली या मंडी वाली सड़कों से बिलकुल जुदा है।दरअसल भारत में तलवार की आकृति की हिमालय पर्वतमाला का यह हिस्सा भौगोलिक रूप से भी अनूठा है। सड़क की दोहरीकरण […] […]
- कट्टरपन्थी नहीं समझ सकते शांति और तर्क की भाषा : डॉ. असगर अली इंजीनियर मई 15, 2013
सुरे-बेसुरे गीतों का ब्लॉग : आगाज़- कुन्दनलाल सहगल के मेरे प्रिय दस गीतमेरे प्रिय दस गीत इस लिस्ट में हैं।पिताजी अपने लिए एक लॉन्ग प्लेयिंग रेकॉर्ड लाये थे।तब ही चस्का लगा।फिर जीजाजी के पास उससे व्यापक संग्रह था। […]
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ और अनिल विश्वास'विविध भारती के संगीत- सरिता कार्यक्रम में अनिल विश्वास से हुई तुशार भाटिया की बात-चीत का पुनर्प्रसारण हो रहा है। आज जो बात हुई वह मुख्यतः फैज अहमद फैज पर थी। आज फैज साहब का जन्म दिन भी है। मैं सुन पाया,गदगद हूं। याहू के एक 'समूह'(विविध भारती) में पूरी बातचीत रोमन लिपि में दर्ज है। AB: Anil Biswas MK: Meena Kapoor TB: Tushar Bhatia TB: shrotaa […]
- मौत से पहले आदमी ग़म से नजात पाए क्यूं ? ग़ालिब / बेग़म अख़्तर
- मालतीदेवी द्वारा बांग्ला काव्य पाठ
- नये और मधुर गीतयह प्लेलिस्ट खासकर अपने अनिवासी मित्रों के लिए । हांलाकि आज-कल कई फिल्में तो पहले विदेशों में रिलीज की जा रही हैं । यह गीत मुझे कर्णप्रिय लगते हैं और नये भी हैं । […]
- कुन्दनलाल सहगल के मेरे प्रिय दस गीत
रेडियोनामा
political blog
टैग्स
'limitation of maoist ideology' aflatoon ambedkar black money blogging capitalism chernobyl communalism corruption dalit democracy development gandhi globalisation hindi poem hindustan india industralisation kishan pattanayak kunwar narayan lohia madhya pradesh mahadev desai marx nuclear power nuclear power plants rajendra rajan samajwadi janaparishad samajwadi janparishad sunil women अम्बेडकर किशन पटनायक गांधी परमाणु बिजली भ्रष्टाचार मध्य प्रदेश राजेन्द्र राजन लोहिया विधान सभा शमीम मोदी सच्चिदानन्द सिन्हा समाजवादी जनपरिषद सुनील हिन्दी कविता- ambedkar blogging brahminism capitalism colas communalism consumerism corporatisation corruption displacement election environment fdi gandhi globalisation globalisation , privatisation half pant industralisation internet kishan patanayak lohia madhya pradesh online journalism poem politics samajwadi janparishad tribal Uncategorized water women
मई 2013 सो मँ बु गु शु श र « अप्रै 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 हिन्दी पढ़ने में दिक्कत तो नहीं ?
मोज़िला ब्राउसर वाले पाठकों को यदि हिन्दी की छपाई (हृस्व इ,दीर्घ ई में) दिक्कत आ रही हो तो वे मोज़िला का सबसे नया मुफ़्त संस्करण इन्स्टॉल कर लें ।
